रविवार, 31 मार्च 2019

संख्या पद्धति के ११ महत्त्वपूर्ण तथ्य - Number system ke top 11 Formula

Number system ke top 11 Formula संख्या पद्धति के ११ महत्त्वपूर्ण तथ्य

संख्या पद्धति (Number system)

प्रायः सभी संख्याओं का निर्माण अंकों से होता है। दाशमिक संख्या प्रणाली में शून्य से लेकर नौ तक (O, 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8 तथा 9) कुल दस अंक होते हैं।
संख्याएँ अनेक प्रकार की होती हैं, नीचे संख्याओं के कुछ प्रकार दिए गए हैं|

प्राकृत संख्याएँ (Natural Numbers)

    वे संख्याएँ जो वस्तुओं की गिनती करने में प्रयुक्त की जाती हैं, प्राकृत संख्याएँ कहलाती हैं।
    N = {1, 2, 3, 4 , . . . . . . . }
 

पूर्ण संख्याएँ (Whole Numbers) 

   यदि प्राकृत संख्याओं के साथ शून्य को भी सम्मिलित कर लिया जाए, तो वे संख्याएँ पूर्ण संख्याएँ कहलाती हैं।
   W = {0, 1, 2, 3, . . . . . .}
 

 पूर्णाक (Integers)  




परिमेय संख्याएँ (Rational Numbers) 

    वे सभी संख्याएँ जिन्हें p / q के रूप में व्यक्त किया जा सके परिमेय संख्याएँ कहलाती हैं;
   जहाँ q # 0
   Q = {p / q : p तथा q पूर्णाक हैं और q # 0}
    जैसे 7, -2, 7/5, 0 इत्यादि परिमेय संख्याएँ हैं।
 

अपरिमेय संख्याएँ (Irrational Numbers)

     वे सभी संख्याएँ जिन्हें p / q के रूप में व्यक्त नहीं किया जा सकता, अपरिमेय संख्याएँ कहलाती हैं; जैसे √2, √3, √5 इत्यादि अपरिमेय संख्याएँ हैं।
     * परिमेय तथा अपरिमेय संख्याओं का योग तथा अन्तर अपरिमेय होता है।
       उदाहरण 3 + √5 एक अपरिमेय संख्या है।
     * परिमेय तथा अपरिमेय संख्याओं का गुणनफल अपरिमेय संख्या होता है।
       उदाहरण 3√5 एक अपरिमेय संख्या है।

वास्तविक संख्याएँ (Real Numbers) 

      वास्तविक संख्याओं में परिमेय तथा अपरिमेय दोनों प्रकार की संख्याएँ आती हैं।
 

सम संख्याएँ (Even Numbers) 

      वे सभी प्राकृत संख्याएँ जो 2 से पूर्णतः विभाजित हो जाती हैं, सम संख्या कहलाता है।
      उदाहरण 2, 4, 6, 8, . . . . . सम संख्याएँ हैं।
   

विषम संख्याएँ (Odd Numbers)

     वे सभी प्राकृत संख्याएँ जो 2 से पूर्णतः विभाजित नहीं होती हैं, विषम संख्याएँ कहलाती हैं।
     उदाहरण 1, 3, 5, 7, . . . . . . विषम संख्याएँ हैं।
   

अभाज्य संख्याएँ (Prime Numbers)

      वे सभी संख्याएँ जो 1 तथा स्वयं के अतिरिक्त किसी अन्य संख्या से पूर्णत: विभाजित न हो, अभाज्य संख्याएँ कहलाती हैं।
      उदाहरण 2, 3, 5, 7, 11, . . . . . . . . सभी अभाज्य संख्याएँ हैं।
   

भाज्य संख्याएँ (Composite Numbers) 

      1 के अतिरिक्त वे सभी प्राकृत संख्याएँ जो अभाज्य नहीं है।
   
भाज्यता की जाँच (Test of Divisibility) 
      * 2 से भाज्य  यदि दी गई संख्या के इकाई के स्थान पर शून्य या सम संख्या हो, तो वह संख्या 2 से भाज्य होगी।
      * 3 से भाज्य  यदि दी गई संख्या के सभी अंकों का योग 3 से विभाजित हो जाता है, तो वह संख्या 3 से भाज्य होगी।
      * 4 से भाज्य  यदि दी गई संख्या के इकाई व दहाई के अंको द्वारा बनी संख्या 4 से विभाजित है, तो वह संख्या 4 से विभाजित होगी।
      * 5 से भाज्य  यदि दी गई संख्या के इकाई के स्थान पर शून्य या 5 हो, तो वह संख्या 5 से भाज्य होगी|
      * 6 से भाज्य  यदि दी गई संख्या 2 तथा 3 से पूर्णतः विभाजित हो जाती है, तो वह संख्या 6 से भाज्य होगी।
      * 8 से भाज्य  यदि दी गई संख्या के अन्तिम तीन अंको द्वारा बनी संख्या 8 से विभाजित हो जाती है, तो वह संख्या 8 से भाज्य होगी।
      * 9 से भाज्य  यदि दी गई संख्या के सभी अंकों का योग 9 से विभाजित हो जाता है, तो वह संख्या 9 से भाज्य होगी।
      * 11 से भाज्य  यदि दी गई संख्या के विषम स्थानों के अंकों तथा सम स्थानों के अंको के योग का अन्तर या तो शून्य है या 11 से विभाजित हो जाता है, तो वह संख्या 11 से भाज्य होगी।

 महत्त्वपूर्ण तथ्य 

 1. प्रथम n प्राकृतिक संख्याओं का योग = n (n + 1)/2
 2. प्रथम n सम प्राकृतिक संख्याओं का योग = n (n + 1) 
 3. प्रथम n तक की सम प्राकृतिक संख्याओं का योग = n/2 (n/2 + 1)
 4.  प्रथम n विषम प्राकृतिक संख्याओं का योग = n²
 5. प्रथम n प्राकृतिक संख्याओं के वर्गों का योग = n (n + 1) (2n + 1)/6
 6. प्रथम n प्राकृतिक संख्याओं के घनों का योग = { n (n + 1)/2}²
 7. a, a + d, a + 2d, a + 3d, . . . . . का n वाँ पद = a + (n - 1)d  
 8. a, a + d, a + 2d, a + 3d, . . . . . के n पदों का योग = n/2 [2a + (n - 1) d] 
 9. a, ar, ar², . . . . . . का n वाँ पद = ar(n-¹)
 10. a, ar, ar², . . . . . के n पदों का योग = a(rñ - 1)/r - 1, जहाँ r > 1 
 11. दो क्रमागत संख्याओं के वर्गों का अन्तर एक विषम संख्या होती है, जो दोनों संख्याओं के योग के बराबर होती है|

शुक्रवार, 29 मार्च 2019

घातांक और करणी के महत्त्वपूर्ण तथ्य एवं सूत्र - Indices and Surds top formula

Indices and Surds top formula (घातांक और करणी के महत्त्वपूर्ण तथ्य एवं सूत्र)


घातांक और करणी (Indices and Surds)

घातांक (Indices)

यदि a जो एक वास्तविक संख्या है, को m बार गुणा किया जाए, जहाँ m धनात्मक पूर्णाक है, तब a × a x . . . . . . m बार = am
a को आधार तथा m को घातांक कहते हैं।

घातांक के नियम (Laws of Indices)

   माना a तथा b दो वास्तविक संख्याएँ हैं तथा m और n दो धन पूर्णाक हैं, तब


करणी (Surds)

  यदि किसी संख्या के मूल का निश्चित मान ज्ञात नहीं किया जा सकता हो, तो उस मूल को करणी कहते हैं।
  उदाहरण  √3, ³√4, ³√6 आदि
 

करणी के नियम (Rules of Surds)

माना a एक परिमेय संख्या है तथा m और n दो धन पूर्णाक हैं, तब



महत्त्वपूर्ण तथ्य एवं सूत्र
      
  * किसी द्विपद द्विघात करणी तथा उसके संयुग्मी का गुणनफल सदैव एक परिमेय संख्या होती है।
 
  * किसी द्विपद द्विघात करणी का परिमेयकारी गुणक, उस करणी का संयुग्मी होता है अर्थात् √a + √b का परिमेयकारी गुणक √a - √b होता है।


शनिवार, 23 मार्च 2019

घन तथा घनमूल के महत्वपूर्ण सूत्र - Important Cubic and Cube root formulas

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घन तथा घनमूल (Cube and cube root)


घन (Cube) 

किसी संख्या को उसके वर्ग से गुणा करने पर जो गुणनफल प्राप्त होता है, उसे उस संख्या का घन  कहते हैं।
उदाहरण- 5 का घुन = 5³ = 5 x 5² = 125

घनमूल (Cube Root)

 किसी दी गई संख्या का घनमूल वह संख्या है जो उसी संख्या को तीन बार गुणा करने पर पुनः दी गई संख्या प्राप्त होती हैं। किसों संख्या का घनमूल दी गई संख्या की तीसरी घात के बराबर होता है।
  किसी संख्या r के घनमूल को ³√r द्वारा निरूपित किया जाता है।
  यदि q = p³ हो, तो p = q¹/³ होता है, अर्थात् p,q का घनमूल हैं।

घनमूल ज्ञात करने की विधि (Method of Finding Cube Root) 
किसी दी गई संख्या का घनमूल ज्ञात करने के लिए अभाज्य गुणनखण्ड विधि का प्रयोग करते हैं। सर्वप्रथम दी गई संख्या के अभाज्य गुणनखण्ड ज्ञात करते हैं। इन गुणनखण्डों के तीन - तीन के समूह बनाते हैं। घनमूल के लिए इन तीन - तीन के प्रत्येक समूह में से एक - एक गुणनखण्ड लेते हैं। इनकी गुणा करने पर प्राप्त गुणनफल दी गई संख्या का घनमूल होता है।
उदाहरणार्थ संख्या 0.000216 का घनमूल इस प्रकार निकालेंगे।

सोमवार, 18 मार्च 2019

गणित मे वर्ग तथा वर्गमूल के महत्त्वपूर्ण 3 स्मरणीय बिंदु - math me varg tatha vargamool ke mahattvapoorn 3 smaraneey bindu


वर्ग तथा वर्गमूल (Square and square root)

वर्ग (Square)
 जब किसी दी गई संख्या की उसी संख्या से गुणा की जाती है, तो प्राप्त गुणनफल दी गई संख्या का वर्ग कहलाता है।
 उदाहरण - 5 का वर्ग = 5² = 5 x 5 = 25

वर्गमूल (Square Root) 
 किसी दी गई संख्या का वर्गमूल वह संख्या है, जिसका वर्ग करने पर दी गई संख्या प्राप्त होती है। इसे चिह्न (√) द्वारा प्रदर्शित करते है।
 उदाहरण - 4 का वर्गमूल = √4 = 2

वर्गमूल ज्ञात करने की विधियाँ (Methods of Finding Square Root)
वर्गमूल दो विधियों से ज्ञात किया जाता है-
1. गुणनखण्ड विधि
2. भाग विधि 

1. गुणनखण्ड विधि (Factor Method) 
     इस विधि द्वारा वर्गमूल ज्ञात करने के लिए निम्न चरणों का पालन किया जाता है-
  (I) सर्वप्रथम दी गई संख्या के अभाज्य गुणनखण्ड करते है।
  (II) समान गुणनखण्डों के जोड़े बनाते हैं।
  (III) प्रत्येक जोड़े से एक - एक गुणनखण्ड लेकर उनका गुणनफल ज्ञात करते हैं। प्राप्त गुणनफल ही दी गई संख्या का वर्गमूल होता है।
  जैसे - √18225 = √5x5 x 3x3 x 3x3 x 3x3 ( अभाज्य गुणनखण्ड )
   = 5 × 3 × 3 × 3 = 135
   (प्रत्येक जोड़े की एक-एक संख्या का गुणनफल)

2. भाग विधि ( Division Method ) 
    1. दी गई संख्या के इकाई के अंक की ओर से दो-दो अंकों के जोड़े बनाये जाते हैं।
    2. बाईं ओर के सबसे पहले जोड़े या अंक में ऐसी संख्या से भाग देते हैं। जिसका वर्ग उस जोड़े या अंक के बराबर हो या उससे कम। इसी संख्या को भाजक तथा भागफल के स्थान पर लिख देते हैं।
    3. शेषफल ज्ञात करके अगले जोड़े को शेषफल के दाईं ओर लिखते हैं।
    4. भागफल का दुगुना करके प्राप्त संख्या को भाजक के स्थान पर रखते हैं। भाजक में रखी गई संख्या के दाईं ओर एक ऐसा अंक लिखते हैं जिससे बने भाजक को गुणा करने पर प्राप्त गुणनफल भाज्य के बराबर या उससे कम हो।
    5. प्राप्त शरफल को भोज्य के नीचे लिखकर शेषफल ज्ञात करते हैं तथा भाजक में रखे गए अंक को भागफल में लिख देते हैं।
    6. यह क्रिया तब तक करते हैं जब तक कि सब जोड़े समाप्त नहीं हो जाते। प्राप्त भागफल ही दी गई संख्या का अभीष्ट वर्गमूल है।
    जैसे — संख्या 190096 का वर्गमूल भाग विधि से इस प्रकार ज्ञात किया जाता है।



 स्मरणीय बिंदु
                 
1. सम संख्या का वर्गमूल सम संख्या तथा विषम संख्या का वर्गमूल विषम संख्या होता हैं।
2. √x + √x + √x . . . n बार = x
3. जिस संख्या के अन्त में इकाई का अंक 2, 3 या 7 हो, तो वह संख्या पूर्ण वर्ग नहीं होगी।

शनिवार, 16 मार्च 2019

(गणित) सरलीकरण के top 5 सूत्र Top 5 Formulas of Simplification (math)


सरलीकरण ( Simplification ) 

जब किसी व्यंजक में एक साथ एक से अधिक संक्रियाएँ (कोष्ठक , योग , अन्तर , गुणा , भाग , या का) हों, तो उन्हें सरल करने के लिए BODMAS क्रम का पालन करते हैं।

B - कोष्ठक (Bracket)
      Vi (रेखा कोष्ठक), Ci (छोटा कोष्ठक),
       Cu (मझला कोष्ठक), Sq (बड़ा कोष्ठक)
O - का (Of)
D - भाग (Division)
M - गुणा (Multiplication)
A - योग (Addition)
S - अन्तर (Subtraction)

उपरोक्त क्रम के अलावा व्यंजकों के सरलीकरण में विभिन्न बीजगणितीय सूत्रों का भी प्रयोग किया जाता है|

नोट - यह आवश्यक नहीं है कि किसी प्रश्न में समस्त संकेत (का , + , X , + , -) दी हुई हो, कोई भी संक्रिया अनुपस्थित रह सकती है। किन्तु क्रम वही बना रहेगा| जैसे - किसी प्रश्न में ‘का' दिया हो पुन: '+' अनुपस्थित हो, तो उसी क्रम में आगे (x, +, -) की संक्रिया करते हैं।

अर्थात् यदि किसी प्रश्न में उपरोक्त सभी प्रक्रियाएँ हों, तो सबसे पहले कोष्ठकों की संख्याओं को हल करते हैं, तत्पश्चात् ‘का' की क्रिया, अर्थात् गुणा (of) इन सभी के बाद भाग, गुणा, जोड़ तथा घटाव की क्रिया करते हैं। अन्त में हल करके जो मान आता है, वही सरलीकरण का सबसे सरल (संक्षिप्त) रूप होता है; जैसे -
1 × 3/4 - [3 × 1/8 ÷ {6 - (2 × 3/4 - 11/12)}] का सरलतम रूप निम्न प्रकार से चरणबद्ध प्राप्त करेंगे -
 1 × 3/4 - [3 × 1/8 ÷ {6 - (11/4 - 11/12)}]
           = 7/4 - [25/8 ÷ {6 - (33 - 11 / 12)}]
           = 7/4 - [25/8 ÷ {72 - 22 / 12}]
           = 7/4 - [25/8 × 12/50]
           = 7/4 - [6/8]
           = 14 - 6 / 8
           = 8/8
           = 1

सरलीकरण के व्यंजक निम्नलिखित विषयों पर आधारित हो सकते हैं
1 . सामान्य गणना ( General Calculation )
2 . बीजगणितीय विधि से गणना ( Calculation by Algebraic Method )
3 . साधारण एवं दशमलव भिन्न ( Simple and Decimal Fraction )

1 . सामान्य गणना ( General Calculation ) सामान्य गणना के अन्तर्गत जोड़, घटाव, गुणा, भाग आदि की संक्रियाएँ आती हैं; जैसे -
3 x [ 4 + 63 x 7 - 6 ÷ 3 ]
               = [4 + 441 - 6/3] x 3
               = [ 445 - 21] × 3
               = [ 443 ] x 3
               = 1329
             
2 . बीजगणितीय विधि से गणना ( Calculation by Algebraic Method ) कुछ गणनाएँ बीजगणितीय सूत्रों का सहारा लेकर की जाती हैं; इन सूत्रों की सहायता से व्यंजक को सरल करने में काफी कम समय लगता है; जैसे -

        (0.5)³ + (0.6)³ / (0.5)² - (0.3) + (0.6)²
     
 माना 0.5 = a तथा 0.6 = b

 तब   a³ + b³ / a² - ab + b²
       = (a + b) (a² - ab + b²) / (a² - ab + b²)                                 
        = a + b
     
 इस प्रकार,     a + b = 0.5 + 0.6 = 1.1

3 . साधारण एवं दशमलव भिन्न पर आधारित गणना ( Calculation Based on Simple and Decimal Fraction ) इस प्रकार के व्यंजक साधारण एवं दशमलव भिन्न के रूप में होते हैं, जो सामान्य गुणा - भाग की क्रियाओं से हल किए जा सकते हैं; जैसे -

     36/10 ÷ 24/25 ÷ 1/x = 15/32 × 48/25
     36/10 × 25/24 × x/1 = 15/32 × 48/25
         X = 15/32 × 48/25 × 10/36 × 24/25
            = 6/25

स्मरणीय सूत्र

1. a³ + b³ / a² - ab + b² = a + b
2. a² - b² / a - b = a + b
3. (a + b) (a - b) = a² - b²
4. (a + b)² = a² + 2ab + b²
5. (a - b)² = a² - 2ab + b²

गुरुवार, 14 मार्च 2019

भिन्न ( Fraction ) के महत्त्वपूर्ण 4 सूत्र (Important 4 Formulas of Fraction)



भिन्न ( Fraction ) 

ऐसी संख्या, जिसे p/q के रूप में व्यक्त किया जा सके, जहां q # 0, भिन्न कहलाती है| जहाँ p को भिन्न का अंश तथा q' को भिन्न का हर कहते हैं।

उदाहरण - 3/5 एक भिन्न है, जिसमें 3 , भिन्न का अंश तथा 5 भिन्न का हर है ।

भिन्नों के प्रकार ( Types of Fractions ) 

भिन्नों के प्रमुख प्रकार निम्नवत् हैं ।

1 . दशमलव भिन्न ( Decimal Fraction ) वे भिन्न जिनके हर 10 या 10 की घातु में हो, दशमलव भिन्न कहलाती हैं ।
उदाहरण 3/10 , 9/100 , 13/1000 आदि

2 . उचित भिन्न ( Proper Fraction ) वे भिन्न जिनके अंश, हर से कम होते हैं, उचित भिन्न कहलाती हैं|
उदाहरण 3/7 , 4/9 आदि

3 . अनुचित भिन्न ( Improper Fraction ) वे भिन्न जिनके अंश, हर से अधिक होते हैं, अनुचित भिन्न कहलाती हैं ।

भिन्नों की तुलना ( Comparison of Fractions ) 

भिन्नों की तुलना करने में निम्न विधियों का प्रयोग करते हैं।
1 . भिन्नों को दशमलव रूप में परिवर्तित करके  जब दो या दो से अधिक भिन्नों की तुलना करनी हो, तो उन्हें दशमलव रूप में परिवर्तित करके उनकी तुलना की जा सकती है ।
2 . भिन्नों का हर समान करके  दिए गए भिन्नों में सभी भिन्नों के हरों का ल. स. लेकर उनके हर समान कर लिए जाते हैं, फिर उनके अंशों की तुलना की जाती है । बड़े अंश वाली भिन्न बड़ी होती है ।
               

             महत्त्वपूर्ण तथ्य एवं सूत्र
               

भिन्नों पर संक्रियाएँ ( Multiplication of Fractions ) 

1 . भिन्नों का योग (Addition of Fractions) 
( i ) जब हर समान हो ।
    • a d/c + d e/c = ( a + d ) + ( b + e)/c
( ii ) जब हर असमान हो
    • a d/c + d e/f = a + d + {(b × f + c × e)/c × f}
   
2 . भिन्नों का अन्तर (Subtraction of Fractions) 
( i ) जब हर समान हो |
     • a b/c - d e/c = (a - d) + {(b - e)/c}
( ii ) जब हर असमान हो ।
     • a b/c - d e/f = a - d + {(b × f - c × e)/c × f}

3 . भिन्नों की गुणा (Multiplication of Fractions) 
• a × b  c/d = (a × b) + (a × c/d)
• a b/c × d e/f = (ac + b)(df + e)/c×f

 4 . भिन्नों का भाग (Division of Fractions)  • a ÷ b/c = ac/b
• a/b ÷ c = a/bc
• a/b ÷ c/d = ad/bc

• यदि a/b तथा c/d दो भिन्न हैं तथा ad > bc, तब, a/b > c/d
• यदि दिए गए भिन्नों के अंश व हर का अन्तर समान हो, तो सबसे बड़े अंश वाली भिन्न सबसे बड़ी तथा सबसे छोटे अंश वाली भिन्न सबसे छोटी होती है ।