मंगलवार, 30 अप्रैल 2019

Vikshepan Kise Kehte Hai: विक्षेपण किसे कहते हैं | विक्षेपण की मापें


विक्षेपण किसे कहते हैं | विक्षेपण की मापें - vikshepan kise kahate hain | vikshepan kee maapen

विक्षेपण की मापें (Measures of Dispersion)

Vikshepan Kise Kehte Hai: विक्षेपण किसे कहते हैं | विक्षेपण की मापें

माध्य विचलन (Mean Deviatio)


1. अवर्गीकृत श्रेणी के लिए (For the Individual Series) 



जहाँ, n = पदों की संख्या
xᵢ = पद का मान
तथा        ⃗x = औसत
(वह माध्य जिससे विचलन ज्ञात करना है)

2. सतत् व असतत् श्रेणी के लिए (For the Continuous and Discrete Series) 

जहाँ            ⃗x = औसत
fᵢ = पद की बारम्बारता
xᵢ = पद का मान
माध्य विचलन का गुणांक = माध्य विचलन/संगत औसत

मानक विचलन (Standard Deviation)

1. अवर्गीकृत श्रेणी के लिए (For the Individual Series) 

जहाँ           n = पदों की संख्या
⃗x = औसत

2. सतत् व असतत् श्रेणी के लिए (For the Continuous and Discrete Series) 

जन्म - मरण सांख्यिकी (Vital Statistics)

अशोधित जन्म दर (Crude Birth Rate) 
किसी वर्ष प्रति 1000 की जनसंख्या पर जन्म लेने वाले शिशुओं की संख्या, अशोधित जन्म दर कहलाती है।
अशोधित जन्म दर = दिए गए वर्ष में जन्मे बच्चों की संख्या / उस वर्ष के बीच जनसंख्या ⨯ 1000
इसी प्रकार,

अशोधित मृत्यु दर = दिए गए वर्ष में मृत्युओं की संख्या / उस वर्ष के बीच जनसंख्या ⨯ 1000

विशिष्ट मृत्यु दर (Specific Death Rate) 
पूरे जनसमूह को न लेकर किसी एक विशिष्ट वर्ग की प्रति 1000 जनसंख्या पर किसी वर्ष मरने वालों की संख्या को उस वर्ष के लिए उस वर्ग की विशिष्ट मृत्यु दर कहा जाता है।
विशिष्ट मृत्यु दर
= दिए गए वर्ष के विशिष्ट वर्ग में मरने वालों की संख्या / उस वर्ष के बीच उस वर्ग की जनसंख्या ⨯ 1000

मानक मृत्यु दर (Standard Death Rate)

जहाँ           Sᵢ = iवें वर्ग की मानकीकृत
जनसंख्या
Dᵢ = iवें वर्ग की विशिष्ट मृत्यु दर

निर्वाह - खर्च सूचकांक (Cost of Living Index Number) 

= अभीष्ट वर्ष में कुल खर्च / आधार वर्ष
में कुल खर्च ⨯ 1000

जहाँ, P₁ᵢ = अभीष्ट वर्ष में iवीं वस्तु का प्रति इकाई                                                               मूल्य
q₁ᵢ = अभीष्ट वर्ष में iवीं उपभोग की गई वस्तु
की मात्रा
p₀ᵢ = आधार वर्ष में iवीं वस्तु का प्रति इकाई
मूल्य
q₀ᵢ = आधार वर्ष में iवीं उपभोग की गई वस्तु
की मात्रा
तथा     k = उपभोग की गई वस्तुओं की संख्या
स्मरणीय बिन्दु

1. बंटन के प्रेक्षणों में से अधिकतम तथा न्यूनतम प्रेक्षणों का अन्तर परास कहलाता है। यदि प्रेक्षणों में L अधिकतम तथा S न्यूनतम प्रेक्षण हैं, तब परास = L - S तथा परास का गुणांक (परिसर) = L - S / L + S

2. मानक विचलन या प्रसरण में किसी एक ही संख्या को जोड़ने या घटाने पर कोई अन्तर नहीं आता है। परन्तु भाग करने या गुणा करने पर अन्तर आता हैं।

3. सांख्यिकीय आँकड़ों में समान्तर माध्य से व्यैक्तिक मानों के विचलनों का योग शून्य होता है तथा विचलनों के वर्गों का योग न्यूनतम होता है।
अर्थात्

4. विक्षेपण गुणांक (Coefficient of dispersion) 

= मानक विचलन / समान्तर माध्य × 100

रविवार, 28 अप्रैल 2019

कराधान (Taxation) किसे कहते है | कराधान का अर्थ क्या हैं - karaadhaan (taxation) kise kahate hai | karaadhaan ka arth kya hain


कराधान (Taxation) किसे कहते है | कराधान का अर्थ क्या हैं - karaadhaan (taxation) kise kahate hai | karaadhaan ka arth kya hain

कराधान (Taxation)

      किसी भी सरकार (केन्द्र अथवा राज्य) को देश अथवा राज्य चलाने (कानून व्यवस्था, अच्छी शिक्षा का प्रबन्ध, नागरिकों को सुरक्षा प्रदान करने, उचित न्याय दिलाने, देश की रक्षा करने, इत्यादि कार्यो) हेतु धन की आवश्यकता पड़ती है। सरकार इन खर्चे को पूरा करने के लिए विभिन्न माध्यमों के जरिए धन की उगाही करती है। कराधान भी सरकार द्वारा धन संग्रह का एक कार्य है, जो देश को सुचारू रूप से चलाने के लिए आवश्यक है। भारत में राजस्व विभाग, राजस्व से संबंधित प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कर के मामलों पर दो संवैधानिक बोर्डो - केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड और केन्द्रीय उत्पाद एवं सीमा शुल्क बोर्ड के माध्यम से नियंत्रण रखता है। करारोपण एवं कर - संग्रह की कुछ नियम एवं शर्ते होती हैं। कुछ मामलों में करों में छूट भी दी जाती है। इस अध्याय में विभिन्न परिस्थितियों के अनुरूप लगने वाले ऐसे ही करों की गणना से सम्बन्धित प्रश्नों का समाधान दिया गया है। कराधान के विभिन्न प्रश्नों को आसानी से हल करने के लिए निम्नलिखित तथ्यों को जानना आवश्यक है।

कर से सम्बन्धित महत्त्वपूर्ण तथ्य (Important Facts Related to Tax)


1. कर नागरिकों द्वारा सरकार के विविध क्रियाकलापों में व्यय करने हेतु किया गया योगदान है।

2. कर अनिवार्य योगदान है, किन्तु सामान्यत: इसका भुगतान व्यक्ति की इच्छानुसार ईमानदारीपूर्वक किया जाता है, एदि आवश्यक कर का भुगतान समय पर नहीं किया जाता है, तो इसे कर - चोरी कहा जाता है। कर चोरी एक दण्डनीय अपराध है।

3. सरकार द्वारा नागरिकों पर करारोपण केवल राजस्व में वृद्धि हेतु नहीं किया जाता बल्कि इसका उद्देश्य, प्राप्त धन की मदद से नागरिकों को सुरक्षा मुहैया कराना, देश की रक्षा करना, आर्थिक व्यवस्था को नियंत्रित करना एवं अन्य आवश्यक सुविधाएँ उपलब्ध करवाना होता है।

4. कर दो प्रकार के होते हैं।
(i) प्रत्यक्ष कर (Direct Tax) 
(ii) अप्रत्यक्ष कर (Indirect Tax)

5. किसी व्यक्ति अथवा समूह पर प्रत्यक्ष रूप से आरोपित कर प्रत्यक्ष कर कहलाता है। जैसे — उपहार कर, आयकर, निगम कर, ब्याज कर, प्रतिभूति संव्यवहार कर, बैकिंग रोकड़ संव्यवहार कर, सम्पत्ति कर इत्यादि।

6. किसी व्यक्ति अथवा समूह पर अप्रत्यक्ष रूप से आरोपित कर अप्रत्यक्ष कर कहलाता है, जैसे - बिक्री कर (Sales Tax), उत्पाद शुल्क (Excise Duty), सीमा शुल्क (Custon Duty), सेवा कर (Service Tax) इत्यादि।

7. व्यक्ति या व्यक्ति - समूह की आय पर लगाया गया कर आयकर (Income Tax) कहलाता है। आय के अनुसार आयकर की दरें सरकार द्वारा निर्धारित की जाती है।

8. जब उपहार का मूल्य सरकार द्वारा तय सीमा से अधिक होता है तो इस मूल्य पर उपहार कर (Gift Tax) देना पड़ता है।

9. किसी व्यक्ति की सम्पत्ति पर देय कर सम्पत्ति कर कहलाता है।

10. किसी वित्तीय वर्ष में आयकर पर देय अतिरिक्त कर अधिभार (Surcharge) कहलाता है।

 आयकर की गणना की चरणबद्ध विधि (Stepwise Method for Computation of Income Tax) 


 किसी वित्तीय वर्ष में किसी व्यक्ति के आयकर का परिकलन निम्नलिखित चरणों में किया जाता है

चरण (1) : व्यक्ति की उस वित्तीय वर्ष में सकल आय का परिकलन। 

चरण (2) : मानक एवं अन्य स्वीकार्य कटौतियों का परिकलन। (स्वीकार्य बचत, दान इत्यादि।)

चरण (3) : ₹10 के सन्निकट मान में कर योग्य आय का परिकलन।
              कर योग्य आय = सकल आय - (मानक  
                            कटौती + कटौती योग्य दान) 
           
चरण (4) : कर योग्य आय पर दिए गए वर्ष की कर दर के हिसाब से कर की गणना (₹1 के निकट तक)

चरण (5) : कर की छूट के लिए स्वीकार्य जमा राशि का परिकलन।

चरण (6) : धारा 88 के अधीन स्वीकार्य कर की छूट का परिकलन।

चरण (7) : नेट देय कर की गणना।
                नेट देय कर = कुल कर - कर में छूट
             
चरण (8) : यदि कोई अधिभार (Surcharge) हैं तो उसकी गणना।

चरण (9) : ₹1 के सन्निकट मान में कुल देय कर को गणना।
                कुल देय कर = चरण (7) की राशि +     
                                     चरण (8) की राशि

चरण (10) : वित्तीय वर्ष में यदि पहले से ही कोई आयकर दिया जा चुका है तो उसकी गणना।

चरण (11) : चरण (10) में प्राप्त कर में से चरण (9) में प्राप्त कर को घटाना।

चरण (12) : चरण (11) में प्राप्त शेष कर की राशि वित्तीय वर्ष के अन्तिम माह में दिया जाने वाला कर है।
स्मरणीय बिन्दु

1. वित्तीय वर्ष (Financial Year) 1 अप्रैल से 31 मार्च तक की अवधि एक वित्तीय वर्ष कहलाती है। इसी अवधि पर आयकर, व्ययकर इत्यादि की गणना की जाती है।

2. सकल आय (Gross Income) सभी स्रोतों से एक वित्तीय वर्ष में हुई आय उस वर्ष की सकल आय कहलाती है।

3. स्वीकार्य कटौती (Acceptable Deduction) आयकर से मुक्त कटौतिया स्वीकार्य कटौतियाँ कहलाती हैं । कुछ महत्त्वपूर्ण कटौतियाँ हैं।

 (i) मानक कटौती (Standard Deduction) किसी वित्तीय वर्ष में मानक कटौती की व्यक्ति विशेष के अनुसार अधिकतम सीमा तय होती है।
 (ii) मकान किराया भत्ता (House Rent Allowance) वेतनभोगी व्यक्तियों का कुछ शर्तों के अनुसार मकान किराए भत्ते का कुछ अंश आयकर से मुक्त होता हैं।
 (iii) धारा 80G के आधार पर निम्नलिखित निधियों में दिए गए धन को आयकर से मुक्त रखा गया है
 (a) प्रधानमन्त्री राहत निधि 
 (b) राष्ट्रीय रक्षा निधि 
 (c) आयुर्विज्ञान अनुसन्धान में दान 
 (d) परमार्थ संस्थाओं को देय राशि 

 (iv) वरिष्ठ नागरिकों को आयकर में छूट  वरिष्ठ नागरिकों को 2 लाख 40 हजार रुपये तक की वार्षिक आय पर आयकर में 100 % छूट दी गई है।

(v) महिलाओं को आयकर में छूट  महिलाओं को 1 लाख 90 हजार रुपये तक की वार्षिक आय पर आयकर में 100 % छूट दी गई है।

(vi) विभिन्न प्रकार की बचतों में आयकर से छूट  यदि कोई व्यक्ति अपनी वार्षिक आय में से निम्नलिखित मदों में खर्च करता है तो इन मदों में खर्च राशि पर आयकर में छूट दी जाती है।
(a) जीवन बीमा प्रीमियम (Life Insurance)
(b) भविष्य निधि (Provident Fund) 
(c) लोक भविष्य निधि (Public Provident Fund) 
(d) यूलिप ( ULIP ) 
(e) राष्ट्रीय बचत पत्र (NSC) / राष्ट्रीय बचत योजना (NSS)

शुक्रवार, 26 अप्रैल 2019

त्रिकोणमितीय फलन एवं सर्वसमिकाओं के top सूत्र - Top formulas of trigonometric functions and identities


त्रिकोणमितीय फलन एवं सर्वसमिकाओं के top सूत्र - Top formulas of trigonometric functions and identities

त्रिकोणमितीय फलन एवं सर्वसमिकाएँ (Trigonometric functions and identities)


त्रिकोणमितीय अनुपात (Trigonometric Ratios) 


      किसी समकोण त्रिभुज में दिए गए कोण की सम्मुख भुजा लम्ब, समकोण के सामने की भुजा कर्ण तथा तीसरी भुजा आधार कहलाती है।

त्रिकोणमितीय सर्वसमिकाएँ (Trigonometric ldentities) 



त्रिकोणमितीय अनुपातों में सम्बन्ध (Relation between Trigonometric Ratios)



बैंक जमा - पूँजी तथा किश्तों में भुगतान कैसे करता हैं। (Bank deposits - How to pay in capital and installments)

बैंक जमा - पूँजी तथा किश्तों में भुगतान कैसे करता हैं। (Bank deposits - How to pay in capital and installments)

बैंक जमा - पूँजी तथा किश्तों में भुगतान (Bank Deposits and Payment in Instalments)

      बैंक वह संस्था है जहाँ कोई व्यक्ति अथवा संस्थान अपने बचत के रुपयों को, विभिन्न खातों में निश्चित ब्याज दरों पर जमा करता है। साथ ही बैंक उद्योगों तथा व्यापारिक संस्थाओं को उत्पादन कार्यों के लिए ब्याज पर धन देता है जिसकी दर जमा धनराशि पर दिए गए ब्याज से अधिक होती है।
       विभिन्न बैंकों की अपने यहाँ के विभिन्न खातों हेतु विभिन्न नियम व शर्ते होती हैं, जिनके अनुसार वे खाताधारियों को जमा धन पर ब्याज देते हैं एवं दिए गए ऋण पर ब्याज की वसूली करते हैं। इनके विभिन्न नियमों एवं शर्तों पर आधारित विविध प्रश्नों को हल करने के लिए विभिन्न प्रकार के बैंक खातों एवं भुगतान के तरीकों को समझना आवश्यक है।
     

बैंक खातों के प्रकार (Types of Bank Accounts) 

1. बचत खाता (Saving account) यह सबसे अधिक प्रचलित खाता है। बैंक इस खाते में जमा धनराशि पर समय - समय पर निर्धारित ब्याज दर के अनुसार ब्याज देता है।
2. चालू खाता (Current account) इस खाते में धनराशि जमा करने या निकालने में कोई प्रतिबन्ध नहीं है और न ही कोई ब्याज देय है।
3. सावधि जमा खाता (Fixed deposit account) इस योजना में ब्याज की दर अन्य योजनाओं से अपेक्षाकृत अधिक तथा भिन्न - भिन्न अवधि के लिए अलग - अलग होती हैं।  
4. आवर्ती जमा खाता (Recurring deposit account) इस योजना में एक निश्चित राशि प्रतिमाह किसी निश्चित अवधि के लिए जमा की जाती है। अवधि के पूरा हो जाने पर ब्याज सहित धनराशि मिलती है।

बैंक से रुपयों का भुगतान (Payment of Rupees from Bank) 

      बचत खाते से रुपयों को निम्न दो विधियों द्वारा निकाला जाता है

      1. निकासी - फार्म द्वारा भुगतान
      2. चैक द्वारा भुगतान 


  1. निकासी - फार्म द्वारा भुगतान - रुपये निकालने के लिए बैंक द्वारा निःशुल्क प्रदत्त निकासी फार्म को उचित रूप से भरकर बचत खाते की पासबुक के साथ बैंक को देना होता है। खाताधारी को निकासी - फार्म पर, खाता खोलने के साथ किए गए नमूने के हस्ताक्षर के अनुरूप ही हस्ताक्षर करने होते हैं। सही हस्ताक्षर मिलने पर ही बैंक भुगतान करता है।

2. चैक द्वारा भुगतान - चैक द्वारा भुगतान में बैंक द्वारा ग्राहक को एक चैक बुक प्रदान की जाती है। इसमें से आवश्यकतानुसार चैक निकालकर उसे भरकर बैंक में जमा कर देते हैं तथा रुपये निकालते हैं। खाताधारी को चैक पर, खाता खोलने के साथ किए गए नमूने के हस्ताक्षर के अनुरूप ही हस्ताक्षर करने होते हैं।
      चैक तीन प्रकार के होते हैं
       (i) वाहक चैक (Bearer cheque)
       (ii) आज्ञा धनादेश चैक (Order cheque)
       (iii) रेखांकित चैक (Crossed cheque) 
     
(i) वाहक चैक (Bearer checque) यदि चैक पर छपा वाहक अथवा बियरर (Bearer) शब्द न काटा गया हो तो उसे वाहक धनादेश या बियरर चैक (Bearer Cheque) कहते हैं। इसको कोई भी व्यक्ति भुना सकता है चाहे चैक पर किसी का भी नाम क्यों न हो।
(ii) आज्ञा धनादेश चैक (Order cheque) जब चैक से बियरर शब्द को काट दिया जाता है तब वह आज्ञा धनादेश चैक बन जाता है जिसका भुगतान केवल उस चैक पर लिखे गए नामित व्यक्ति को ही किया जाता है।
(iii) रेखांकित चैक (Crossed cheque) जिसका भुगतान केवल प्राप्तकर्ता के खाते में किया जाता है, वह रेखांकित चैक कहलाता है। 

प्रचलन के अनुसार चैक के ऊपरी बाएँ कोने पर दो समान्तर तिरछी रेखाओं के बीच ‘& CO' Not Negotiable अथवा A/C Payee Only भी लिखा जाता है। ऐसा चैक रेखांकित चैक (Crossed Cheque) कहलाता है।

किश्तों में भुगतान (Payment in Instalments)

      बैक या व्यापारी जो रुपया ऋण के रूप में लोगों को देते है उसका भुगतान प्राय: किश्तो अर्थात् निर्धारित शर्तों के अन्तर्गत निश्चित समय अन्तराल पर कराते हैं ।

स्मरणीय बिन्द 

1. बचत खाते पर ब्याज की गणना निम्न नियमों से की जाती है। 
(i) व्याज न्यूनतम मासिक शेष पर अभिकलित किया जाता है। 
(ii) प्रत्येक माह की 10 तारीख तक जमा की गई राशि ही पूरे महीने के बयाज के भुगतान में भाग लेती है।

2. किश्तों में भुगतान निम्नलिखित नियमों से किया जाता है। 
(i) कुल धन को समान किश्तों में विभाजित करके प्रत्येक किश्त के साथ उस समय का ब्याज भी जोड़ दिया जाता है। 
(ii) पूरे धन व ब्याज को जोड़कर समान किश्तों में विभाजित किया जाता है।
(iii) कुछ नकद राशि देकर शेष राशि को ब्याज सहित किश्तों में दिया जाता है।

3. यदि मूलधन, समय व दर दिए गए हों तो, 
    साधारण ब्याज = मूलधन × दर × समय/100 

     

4. मिश्रधन = मूलधन + ब्याज 

5.

बुधवार, 24 अप्रैल 2019

लघुगणक (Logarithms), लघुगणक के नियम (Laws of Logarithm) और top स्मरणीय बिन्दु

लघुगणक (Logarithms), लघुगणक के नियम (Laws of Logarithm) और top स्मरणीय बिन्दु

लघुगणक (Logarithms)

लघुगणक (Logarithm)

      यदि a कोई धनात्मक वास्तविक संख्या इस प्रकार है कि  aᵐ = x तथा m आधार a पर x का लघुगणक है तब इसे logₐ x = m के रूप में लिखा जाता है।
      उदाहरणार्थ    2³ = 8 को हम log (लॉग) की भाषा में इस प्रकार लिखेंगे।
   
                       log₂ 8 = 3
     

लघुगणक के नियम (Laws of Logarithm) 



 साधारण लघुगणक (Simple Logarithm)

       किसी संख्या के लघुगणक का आधार 10 हो, तो उसे साधारण लघुगणक कहते हैं। लघुगणक के पूर्णाक भाग को पूर्णाश तथा भिन्नात्मक भाग (या दशमलव भाग) को अपूर्णाश कहते हैं।
     

 पूर्णाश तथा अपूर्णाश (Characteristics and Mantissa) 

       संख्या में दशमलव बिन्दु के बाईं ओर (left side) जितने अंक होते हैं उससे एक कम पूर्णाश होता है और यदि दशमलव बिन्दु के बाईं ओर कोई अंक नहीं है, तब दशमलव बिन्दु तथा उसके दाईं ओर (right side) के प्रथम अंक के बीच जितने  शून्य होते हैं उससे एक अधिक, परन्तु ऋणात्मक पूर्णाश होता है। अपूर्णाश सभी संख्याओं का धनात्मक होता है तथा लघुगणक सारणी की सहायता से ज्ञात किया जाता है।
       किसी संख्या के दशमलव बिन्दु का स्थान बदलने से केवल पूर्णाश का मान बदलता है, अपूर्णाश के मान में कोई अन्तर नहीं आता। जैसे
     
                log751.3 = 2.8758
           log 0.07513 = 2.8758

स्मरणीय बिन्दु 

1. लघुगणक सदैव धनात्मक संख्याओं का ही लिया जाता है।  

2. संख्यात्मक गणनाओं में log का आधार 10 होता है जिसे साधारणतया लिखा नहीं जाता।

3. पूर्णांक संख्या के लघुगणक का पूर्णाश, संख्या के अंकों की संख्या से 1 कम होता है अर्थात् पूर्णाश से अंकों की संख्या 1 अधिक होती है। 

रविवार, 21 अप्रैल 2019

बीजगणितीय के 30 महत्त्वपूर्ण सूत्र (30 important formula of algebraic)

बीजगणितीय के 30 महत्त्वपूर्ण सूत्र (30 important formula of algebraic)

बीजगणितीय के सूत्र (Formulas of algebraic)

संख्याएँ दो प्रकार की होती हैं - चर (Variable) एवं अचर (Constant) 
चर संख्याएँ, वे होती हैं, जिनका मान अस्थिर रहता है; जैसे - a, b, x, y, . . . इत्यादि। अचर संख्याए, वे होती हैं, जिनका मान स्थिर रहता है, जैसे - 2, 3, 4, . . . इत्यादि। प्रायः चर संख्याओं का उपयोग कर विभिन्न गणितीय प्रश्नों को हल करने की विधियाँ गणित की शाखा (बीजगणित) के अन्तर्गत आती है। बीजगणित के इन्हीं सूत्रों के आधार पर विभिन्न प्रश्नों को हल किया जा सकता है।

स्मरणीय बिन्दु

1. जब दो धनराशियों को जोड़ा जाता है, तो जोड़ या योगफल भी एक धनराशि होती है।

          (+ a) + (+ b) = + (a + b)
 या            (a) + (b) = (a + b)
           
2. दो ऋण राशियों का योगफल एक ऋण राशि होती है।

          (- a) + (- b) = - (a + b)
         
3. एक ऋण राशि और दूसरी धनराशि का योगफल
         
          (+ a) + (- b) = + (a - b); यदि a > b = -       
                                     (b - a), यदि b > a
         
4. दो राशियो का घटाव
                   
                       a - b = a + (- b)
                   a - (-b) = a + b
              a - (b + c) = a - b - c
 या           a - (b - c) = a - b + c

5. दो राशियों का गुणनफल

              (+ a) × (+ b) = + (ab)
                (- a) × (- b) = + (ab)
               (+ a) × (- b) = - (ab)
               (- a) × (+ b) = - (ab)
             
6. अन्य गुणनफल
                (- a) × (- a) = + (a²)
              (+ a) × (+ a) = + (a²)
              (+ a) × (+ b) = (+ b ) × (+ a)
                (- a) × (- b) = (- b) × (- a)
                     (ab) × c = a × (bc)
                     (ab) × c = b × (ac)
                    a (b + c) = ab + ac
                     a (b - c) = ab - ac
    a (b + c + d + . . .) = ab + ac + ad + . . .
   
7. भाग
                  a ÷ b × b = a
                  a ÷ b ÷ c = a ÷ bc = a/b×c
                         a ÷ b = a × 1/b
                  (- ab) ÷ a = - b
             (- ab) ÷ (- b) = a
               (ab) ÷ (- a) = - b
               (ab) ÷ (- b) = - a
               
 प्रमुख सूत्र 

8. (a + b)² = a² + 2ab + b²

9. (a - b)² = a² - 2ab + b²

10. a² + b² = (a + b)² - 2ab

11. a² + b² = (a - b)² + 2ab

12. a² - b² = (a + b) (a - b)

13. a³ – b³ = (a - b) (a² + ab + b²)

14. a⁴ - b⁴ = (a - b) (a³ + a²b + ab² + b³)

15. a⁵ - b⁵= (a - b) (a⁴ + a³b + a²b² + ab³     
                                                         + b⁴)

16. (a + b)³ = a³ + 3a²b + 3ab² + b³

17. (a + b)³ = a³ + b³ + 3ab (a + b)

18. (a - b)³ = a³ - 3a²b + 3ab² - b³

19. (a - b)³ = a³ - b³ - 3ab (a - b)

20. a³ + b³ = (a + b) (a² - ab + b²)

21. (a + b) (c + d) = ac + ad + bc + bd

22. (a + b + c) (a + b + c) = a² + b² + c²     
                                  + 2 (ab + bc + ca)

23. (a + b + c + d + . . .) (m + n + o + p 
         + . . . .) = a (m + n + o + p + . . .) + b   
          (m + n + o + p + ...) + c (m + n +
          o + p + ....) + d (m + n + o + p 
         + ....)

24. (a + b + c)² = a² + b² + c² + 2 (ab + 
                                                  bc + ca)

25. a³ + b³ + c³ - 3 abc = (a + b + c) (a² 
               + b² + c² - ab - bc - ca) = 1/2 (a + b + c) [(a - b)² + (b - c)² + (c - a)²]
             
26. यदि a + b + c = 0 तब a³ + b³ + c³ =
                                                       3abc
       व्युत्पन्न सूत्र 
     
27. (a + b)² = (a - b)² + 4ab

28. x² + 1/x² = (x + 1/x)² - 2 = (x - 1/x)² + 
                                                                   2

29. x³ + 1/x³ = (x + 1/3)³ - 3 (x + 1/x)

30. x³ - 1/x³ = (x - 1/3)³ - 3 (x - 1/x)

 नोट - 27 से 30 तक के सूत्र महत्त्वपूर्ण सूत्रों से व्युत्पन्न सूत्र हैं। छात्रों को चाहिए कि महत्त्वपूर्ण सूत्रों के साथ - साथ व्युत्पन्न सूत्रों को भी कंठस्थ कर ले ताकि परीक्षा में कम समयावधि में तेजी से प्रश्न हल कर सकें।

शनिवार, 20 अप्रैल 2019

(गणित) गुणनखण्ड के महत्त्वपूर्ण 14 सूत्र (Top 14 Formulas for Factors)

(गणित) गुणनखण्ड के महत्त्वपूर्ण 14 सूत्र (Top 14 Formulas for Factors)
(गणित) गुणनखण्ड के महत्त्वपूर्ण 14 सूत्र (Top 14 Formulas for Factors)

गुणनखण्ड (Factors)

बहुपद (Polynomials)

      एक चर वाले व्यंजक को बहुपद कहते हैं तथा इनकी घातें पूर्णाक में होती हैं। घातों के आधार पर ये तीन प्रकार के होते हैं - रैखिक (1 घात वाले), द्विघात बहुपद (2 घात वाले) तथा त्रिघात बहुपद (3 घात वाले)। 


     जैसे - x + 2y,x² + 2x + 3,x³ + 3x² + 5x + 9
     

गुणनखण्ड (Factors)

      दिए हए व्यंजक को दो या अधिक सरलतम व्यंजको अथवा खण्डों के गणनफल के रूप में व्यक्त कर दिया जाए, तो प्रत्येक व्यंजक अथवा खण्ड को मूल व्यंजक का गुणनखण्ड कहते हैं तथा इस क्रिया को गुणनखण्डन (Factorisation) कहते हैं।

     जैसे – x³ = x × x × x
              9x³ = 3 × 3 × x × x × x

      जिस तरह 8 का गुणनखण्ड 2 × 2 × 2 एवं 6 का गुणनखण्ड 2 × 3 है, उसी प्रकार बहुपदों को भी न्यूनतम सरल व्यंजकों के गुणनफल के रूप में व्यक्त करते हैं। जिसे बहुपदों का गुणनखण्ड कहते हैं। यह अध्याय बहुपदों के गुणनखण्ड पर आधारित है।

स्मरणीय बिन्दु 

1. समूहन विधि में व्यंजक को दो या अधिक ऐसे समूहों में बाँटते हैं जिनमें कोई राशि या संख्या उभयनिष्ठ हो। 

2. द्विघातीय त्रिपद व्यंजक में मध्य पद को इस प्रकार विभाजित करते है, कि वह प्रथम तथा तृतीय पद के गुणनफल के गुणनखण्डों के योग अथवा अन्तर के बराबर हो।
     नोट - यदि तृतीय पद (अचर पद) धनात्मक है, तो योगफल तथा यदि ऋणात्मक है तो अन्तर लेते है। 
     
3. यदि x = p रखने पर ax² + bx + c का शेषफल शून्य के बराबर हो, तो (x - p) इसका एक गुणनखण्ड होगा। 

4. यदि व्यंजक को (x + p) से भाग किया जाए, तो व्यंजक में x = - p रखने पर शेषफल प्राप्त होगा।

5. a² - b² = (a + b) (a - b)

6. (a + b)² = a² + b² + 2ab

7. (a - b)² = a² + b² - 2ab

8. (a + b)³ = a³ + b³ + 3ab (a + b)

9. (a - b)³ = a³ - b³ - 3ab (a - b)

10. a³ + b³ = (a + b) (a² - ab + b²)

11. a³ - b³ = (a - b) (a² + ab + b²)

12. (a + b + c)² = a² + b² + c² + 2ab +             
                                                 2bc + 2ca

13. a³ + b³ + c³ - 3abc = (a + b + c) (a² +   
                                 b² + c² - ab - bc - ca)

14. यदि a + b + c = 0,
      तब a³ + b³ + c³ = 3abc

शुक्रवार, 19 अप्रैल 2019

चाल, समय एवं दूरी के top फार्मूला और महत्त्वपूर्ण ट्रिक

चाल, समय एवं दूरी के top फार्मूला और महत्त्वपूर्ण ट्रिक

चाल, समय एवं दूरी (Speed, Time and Distance)

चाल (Speed) 

      एक वस्तु द्वारा तय की गई दूरी तथा इस दूरी को तय करने में लगे समय के अनुपात को चाल कहते हैं
      चाल का मात्रक किमी/घण्टा या मी/से होता है।

                        समय = दूरी/चाल
                           दूरी = चाल × समय

सापेक्षिक चाल (Relative Speed)  

      जब कोई वस्तु समान दिशा या विपरीत दिशाओं में चलती है, तो सापेक्षिक चाल, इकाई समय में उनके बीच की दूरी के बराबर होती है।

स्मरणीय बिन्दु

1. चाल को किमी/घण्टा से मी/से में बदलने के लिए 5/18 से तथा मी/से से किमी/घण्टा में बदलने के लिए 18/5 से गुणा करते हैं। 

2. औसत चाल = कुल चली गई दूरी/कुल लगा समय 

3. यदि दो समान दूरियाँ, चाल x किमी/घण्टा तथा y किमी/घण्टा से तय की गई हों, तो औसत चाल 2xy/x+y किमी/घण्टा होगी।  

4. यदि दो रेलगाड़ियों (या किसी अन्य वस्तु) की चाल क्रमशः x किमी/घण्टा तथा y किमी/घण्टा हों, तो विपरीत दिशा में सापेक्षिक चाल (x + y) किमी/घण्टा तथा समान दिशा में सापेक्षिक चाल (x - y) किमी/घण्टा होगी। 

5. जब कोई रेलगाड़ी किसी स्थिर वस्तु (पेड़, खम्भा या व्यक्ति) को पार करती है, तो रेलगाड़ी को अपनी लम्बाई के बराबर दूरी तय करनी पड़ती है और जब रेलगाड़ी किसी लम्बी वस्तु (प्लेटफार्म, पुल या रेलगाड़ी) को पार करती है, तो रेलगाड़ी को अपनी लम्बाई तथा वस्तु की लम्बाई के कुल योग के बराबर दूरी तय का पड़ती है। 

6. यदि धारा की दिशा में नाव की चाल u किमी/घण्टा तथा धारा की दिशा के विपरीत दिशा में नाव की चाल v किमी/घण्टा हो, तो 
    (i) शान्त जल में नाव की चाल = u+v/2 किमी/घण्टा 
    (ii) धारा की चाल = u-v/2 किमी/घण्टा 

7. यदि किसी नाव की चाल शान्त जल में x किमी/घण्टा तथा धारा के बहने की दिशा में y किमी/घण्टा हो, तो 
    (i) धारा की दिशा में नाव की चाल = (x + y) किमी/घण्टा 
    (ii) धारा की दिशा के विपरीत दिशा में नाव की चाल = (x - y) किमी/घण्टा

मंगलवार, 16 अप्रैल 2019

कार्य तथा समय के महत्त्वपूर्ण नियम और स्मरणीय बिन्दु मैथ (Important Rules and Memorable Points of Work and Time math)

कार्य तथा समय के महत्त्वपूर्ण नियम और स्मरणीय बिन्दु मैथ (Important Rules and Memorable Points of Work and Time math)

कार्य तथा समय (Work and time)

यदि 10 व्यक्ति किसी कार्य को 20 दिनों में करते है तो उस कार्य के आधे भाग को पूरा करने में उन्हें 10 दिन लगेगे, इसी तरह 5 व्यक्ति उस कार्य को 40 दिन में पूरा कर पाएंगे। इस उदाहरण से कार्य एवं समय का सम्बन्ध स्पष्ट होता है। कार्य एवं समय पर आधारित प्रश्नों को वैसे तो ऐकिक नियम द्वारा हल किया जा सकता है, किन्तु यहॉ दिए गए नियमों एवं सूत्रों की सहायता से ऐसे प्रश्नों को लघु विधि द्वारा अपेक्षाकृत कम समय में हल किया जा सकता है।

महत्त्वपूर्ण नियम (Important Rules) 

1. यदि किसी व्यक्ति द्वारा एक काम पूरा करने में x दिन का समय लगे, तो व्यक्ति द्वारा 1 दिन में किया गया काम 1/x होगा।
2. यदि किसी व्यक्ति द्वारा 1 दिन में 1/x भाग काम किया जाता है, तो व्यक्ति द्वारा पूरा काम समाप्त करने में x दिन लगेंगे।
3. यदि किसी काम को करने के लिए व्यक्तियों की संख्या बढ़ाई जाए, तो काम समाप्त होने में उसी अनुपात में समय कम लगता है।
4. यदि किसी व्यक्ति A की काम करने की क्षमता, किसी अन्य व्यक्ति B की काम करने की क्षमता की x गुनी हो, तो किसी काम को करने में A को B के समय का 1/x गुना समय लगेगा।
5. यदि A तथा B किसी काम को भिन्न - भिन्न समय में करते हों, तो

 (A का काम) : (B का काम) = (B द्वारा लिया समय) : (A द्वारा लिया समय)

स्मरणीय बिन्दु

1. यदि किसी व्यक्ति द्वारा एक कार्य को पूरा करने में x दिन का समय लगे, तो व्यक्ति द्वारा 1 दिन में किया गया कार्य 1/x होगा। 
       
अर्थात्          एक दिन का कार्य = पूरा कार्य / कार्य समाप्त करने के दिनों की संख्या 

2. यदि M₁ व्यक्ति D₁ दिनों में H₁ घण्टे प्रतिदिन काम करके W₁ भाग कार्य करते है तो M₂ व्यक्ति D₂ दिनों में H₂ घण्टे प्रतिदिन कार्य करके W₂ कार्य करेंगे। 

यथा    M₁D₁H₁/W₁ = M₂D₂H₂/W₂

3. यदि 'अ', 'ब' तथा 'स' के कार्य का अनुपात m : n : p हो तथा कार्य के अन्त में वे ₹x कमाते हैं। 

तब,   'अ' का भाग = m/m+n+p × x 
         ‘ब’ का भाग = n/m+n+p × x
तथा   'स' का भाग = p/m+n+p × x

4. यदि A की कार्य करने की क्षमता B के कार्य करने की क्षमता की x गुनी हो, तो किसी कार्य को करने में A को B के समय का 1/x गुना समय लगेगा। 

5. यदि A, B तथा C किसी कार्य को क्रमशः x, y तथा z दिनों में कर सकते हैं, तो तीनों मिलकर उसी कार्य को xyz/xy+yz+zx दिनों में पूरा करेंगे। 

6. यदि A तथा B किसी कार्य को x दिन में तथा A अकेला उसी कार्य को y दिन में कर सकता है, तो B अकेला उस कार्य को xy/y-x दिन में पूरा करेगा। 

7. यदि A व B किसी कार्य को क्रमशः x तथा y दिन में पूरा करते हैं तथा A व B दोनों एक साथ मिलकर कार्य प्रारम्भ करते हैं, परन्तु A ने कार्य समाप्त होने के n दिन पहले कार्य करना छोड़ दिया, तो कार्य समाप्त होने में (x+n)y/(x+y) दिन लगेंगे।

रविवार, 14 अप्रैल 2019

साधारण तथा चक्रवृद्धि ब्याज के महत्त्वपूर्ण तथ्य एवं सूत्र - Important facts and formula of simple and compound interest

साधारण तथा चक्रवृद्धि ब्याज के महत्त्वपूर्ण तथ्य एवं सूत्र - Important facts and
formula of simple and compound interest
Important facts and formula of simple and compound interest(साधारण तथा चक्रवृद्धि ब्याज के महत्त्वपूर्ण तथ्य एवं सूत्र)

साधारण तथा चक्रवृद्धि ब्याज (Simple and Compound Interest)

साधारण ब्याज (Simple Interest) 

      जब किसी राशि को किसी निश्चित दर से किसी निश्चित समय के लिए उधार लिया जाता है, तब समय समाप्ति पर मूलधन के साथ अतिरिक्त राशि वापस की जाती है। इस अतिरिक्त राशि को ब्याज कहते हैं। 
   
      साधारण ब्याज (SI) = मूलधन×दर×समय / 100 = P×r×t / 100

मूलधन (Principal)  

      यह वह राशि है जिसे कोई व्यक्ति किसी से उधार के रूप में लेता है या किसी को देता है। इसे P से व्यक्त करते हैं।
   

समय (Time) 

      वह अवधि या समय जिसके बाद उधार के रूप में ली गई राशि ब्याज के साथ वापस की जाती है।
      साधारण ब्याज में इसे t से तथा चक्रवृद्धि ब्याज में इसे n से व्यक्त करते हैं।
     

दर (Rate) 

      उधार ली गई राशि पर ब्याज की गणना के लिए प्रयुक्त दर को ब्याज की दर कहते हैं। इसे r% से व्यक्त करते हैं।

मिश्रधन (Amount)  

      मूलधन व ब्याज के योग को मिश्रधन कहते हैं।
     
      मिश्रधन = मूलधन (P) + साधारण ब्याज (SI)
                  = P (1 + rt/100)
               

चक्रवृद्धि ब्याज (Compound Interest) 

      जब एक निश्चित समय बाद मूलधन के साथ - साथ साधारण ब्याज पर भी ब्याज की गणना की जाती है तो इस प्रकार प्राप्त व्याज को चक्रवृद्धि ब्याज कहते है।
   
      चक्रवृद्धि मिश्रधन, (A) = मूलधन (1 + दर/100)समय
                                      = P(1 + r/100)ⁿ
                                   
      चक्रवृद्धि ब्याज = चक्रवृद्धि मिश्रधन - मूलधन

महत्त्वपूर्ण तथ्य एवं सूत्र 

• जब ब्याज छमाही देय हो, तो ब्याज की दर आधी व समय दोगुना करते हैं। 
• जब ब्याज तिमाही देय हो, तो ब्याज की दर चौथाई व समय चार गुना करते हैं। 
• चक्रवृद्धि ब्याज की दर से कोई धन किसी निश्चित समय n में x गुना हो जाता है, तो xʸ गुना होने में y × n समय लगेगा।
• जब समय एक परिमेय संख्या हो; जैसे 2 1/3 वर्ष, तो
           A = P (1 + r/100)² (1 + 1/3 r / 100)

बुधवार, 10 अप्रैल 2019

बट्टा के महत्त्वपूर्ण सूत्र - Important formula of discount

बट्टा के महत्त्वपूर्ण सूत्र - Important formula of discount
Important formula of discount (बट्टा के महत्त्वपूर्ण सूत्र)

बट्टा (Discount) 

लागत मूल्य (Cost price) 

      किसी वस्तु को जिस मूल्य पर क्रय किया जाता है या वस्तु को खरीदने में जो लागत आती है, वह लागत मूल्य कहलाता है।

   
अंकित मूल्य (Marked Price) 

      यह वह मूल्य होता है, जो किसी वस्तु पर या पैकेट पर लिखा य अंकित रहता है। इसे सूची मूल्य भी कहते हैं।
      यदि किसी वस्तु पर r% छूट देकर भी R% का लाभ प्राप्त करना हो, तो
   
      वस्तु का अंकित मूल्य = क्रय मूल्य x (100+R / 100-r)

बट्टा (Discount) 

      जब कोई व्यापारी अपनी बिक्री बढ़ाने के लिए या ग्राहकों को लुभाने के लिए अंकित मूल्य पर कुछ छूट देता है, तो इसी छूट को बट्टा कहते हैं। बट्टे का सामान्य अर्थ छूट से है।

क्रमिक बट्टा (successive discount)

      जब दो या दो से अधिक बट्टों की घोषणा की जाती है, तो वह क्रमिक बट्टा कहलाता है।
      यदि किसी वस्तु के अंकित मूल्य पर क्रमशः r% व R% का बट्टा दिया जा रहा हो, तो

      वस्तु का विक्रय मूल्य
   
      = अंकित मूल्य × 100-r / 100 × 100-R / 100
   

 समतुल्य बट्टा (Discount Equivalent) 

       यदि दो बट्टा श्रेणी a% व b% हो, तो इनका
     
समतुल्य बट्टा = [a + b - ab/100]%
     
• बट्टा सदैव अंकित मूल्य पर दिया जाता है।

सोमवार, 8 अप्रैल 2019

लाभ और हानि के 4 महत्त्वपूर्ण सूत्र - 4 important formula of profit and loss

लाभ और हानि के 4 महत्त्वपूर्ण सूत्र - 4 important formula of profit and loss
4 important formula of profit and loss (लाभ और हानि के 4 महत्त्वपूर्ण सूत्र)

लाभ और हानि (Profit and Loss)

परिचय
      किसी वस्तु की खरीद - बिक्री से लाभ प्राप्त करना मनुष्य की स्वाभाविक प्रकृति है। प्रत्येक व्यक्ति लाभ प्राप्त करना चाहता है, परन्तु लाभ प्राप्त करने के प्रयास में कभी - कभी हानि भी हो जाती है। यह अध्याय इसी लाभ एवं हानि की गणना से सम्बन्धित है।

क्रय मूल्य (Cost Price) 

      जिस मूल्य पर कोई वस्तु खरीदी जाती है, वह मूल्य उस वस्तु का क्रय मूल्य कहलाता है।
   

विक्रय मूल्य (Selling Price)

      जिस मूल्य पर कोई वस्तु बेची जाती है, वह मूल्य उस वस्तु का विक्रय मूल्य कहलाता है।
   

लाभ (Profit) 

      यदि किसी वस्तु का विक्रय मूल्य वस्तु के क्रय मूल्य से अधिक हो, तो वस्तु को बेचने पर लाभ होता है।
      लाभ = विक्रय मूल्य - क्रय मूल्य
   

हानि (Loss) 

      यदि किसी वस्तु का विक्रय मूल्य वस्तु के क्रय मूल्य से कम हो, तो वस्तु को बेचने पर हानि होती है।

      हानि = क्रय मूल्य - विक्रय मूल्य
   
• वस्तुओं को लाने व ले जाने में तथा अन्य व्यय उपरिव्यय (Overhead) में आते हैं। यदि प्रश्न में उपरिव्यय दिये गये हों, तो उन्हें क्रय मूल्य में सम्मिलित कर लेते हैं। 

 महत्त्वपूर्ण सूत्र (Important Formulae) 

(1) प्रतिशत लाभ = (लाभ×100 / क्रय मूल्य)%

(2) प्रतिशत हानि = (हानि×100 / क्रय मूल्य)%

(3) यदि किसी वस्तु को बेचने पर x% लाभ हो, तो
 वस्तु का क्रय मूल्य = विक्रय मूल्य×100 /(100+x)
 तथा वस्तु का विक्रय मूल्य = क्रय मूल्य×(100+x) / 100

 (4) यदि किसी वस्तु को बेचने पर x% की हानि हो, तो
   वस्तु का क्रय मूल्य = विक्रय मूल्य×100 / (100 - x)
   तथा वस्तु का विक्रय मूल्य = क्रय मूल्य×(100-x) / 100

स्मरणीय बिन्दु

1. यदि किसी वस्तु का क्रय मूल्य ₹x तथा लाभ y% हो, तो उस वस्तु का विक्रय मूल्य = ₹  x(100 + y) / 100 होगा। 

2. यदि किसी वस्तु का विक्रय मूल्य ₹x तथा लाभ y% हो, तो उस वस्तु का क्रय मूल्य = ₹ 100×x / 100+y होगा। 

3. यदि किसी वस्तु को ₹x में बेचने पर y% की हानि होती है, तथा उसे z% लाभ पर बेचना हो तो उस वस्तु का विक्रय मूल्य = ₹ (100+z) x / 100 होगा। 

4. यदि x वस्तुओं का क्रय मूल्य y वस्तुओं के विक्रय मूल्य के बराबर हो, तो प्रतिशत लाभ / हानि = [x -y/y × 100 %] यहाँ '+' लाभ व '-' हानि दर्शाता है।

5. किसी वस्तु को ₹x में बेचने पर z% की हानि होती है। उस वस्तु को ₹y में बेचने पर yx(100-z) / 100 प्रतिशत का लाभ होगा|

6. कोई व्यक्ति ₹x में दो वस्तुओं को समान मूल्य पर खरीदता है और उसमें से एक को y% लाभ पर तथा दूसरे को y% हानि पर बेचता है, तो प्रतिशत लाभ या प्रतिशत हानि 0 होती है। 

7. जब कोई व्यक्ति दो वस्तुओं को समान मूल्य पर बेचता है और उनमें से एक को x% लाभ पर तथा दूसरे को x% हानि पर बेचता है, तो उसे हमेशा x²/100 % की हानि होती है। 

8. यदि x वरतुओ का क्रय मूल्य y वस्तुओं के विक्रय मूल्य के बराबर हो, तो प्रतिशत लाभ या हानि x-y/y × 100% होगी। 

(नोट - यदि निष्कर्ष '+' हो तो लाभ तथा '-' हो तो हानि होगी।) 

9. यदि कोई व्यक्ति ₹x में y वस्तुओं को खरीदता है और उन्हें ₹y में x वस्तुओं की दर से बेचता है, तो 

 (i) जहाँ x > y हो, वहाँ प्रतिशत हानि = (x² - y²)/x² x 100 तथा

(ii) जहाँ x < y हो, वहाँ प्रतिशत लाभ = (y² - x²)/x² x 100 होगा।


रविवार, 7 अप्रैल 2019

प्रतिशत के top सूत्र और स्मरणीय बिन्दु - Percent of top formula and memorable points


Percent of top formula and memorable points (प्रतिशत के top सूत्र और स्मरणीय बिन्दु)

प्रतिशत (Percent) 

प्रतिशत (Percent) 

      वह भिन्न जिसका हर 100 होता है, प्रतिशत कहलाती है। प्रतिशत को % से निरूपित करते हैं।
     
      उदाहरण.     x % = x/100
                      25 % = 25/100
               

नियम (Rules) 


1. x का y % = xy/100

2. किसी भी भिन्न या दशमलव भिन्न को प्रतिशत के रूप में बदलने के लिए उसमें 100 से गुणा करके प्रतिशत का चिन्ह लगा देते हैं।
उदाहरण. 4/25 = 4/25 x100% = 16%

3. प्रतिशत को दशमलव भिन्न या भिन्न में परिवर्तित करने के लिए उसे 100 से भाग देकर प्रतिशत का चिन्ह हटा देते हैं।
उदाहरण.  36 % = 36/100 = 0.36

4. किसी संख्या के मान में हुई कमी या वृद्धि का प्रतिशत
     = मान में कमी या वृद्धि / संख्या का प्रारम्भिक मान  × 100%

स्मरणीय बिन्दु

1. किसी साधारण भिन्न को प्रतिशत में बदलने के लिए दिए गए भिन्न को 100 से गुणा करके प्राप्त राशि में प्रतिशत का संकेत लगा दिया जाता है।
2. किसी प्रतिशत को भिन्न में बदलने के लिए उसे 100 से भाग दिया जाता है तथा प्रतिशत का संकेत (%) हटा दिया जाता है। 
3. दशमलव भिन्न को प्रतिशत में बदलने के लिए सबसे पहले दशमलव भिन्न को साधारण भिन्न में बदल दिया जाता है। साधारण भिन्न को 100 से गुणा करके प्राप्त राशि में प्रतिशत का संकेत (%) लगा दिया जाता है। 
4. यदि x का मान y से r% अधिक हो, तो y का मान x से कम है। 
             ={r/100+r × 100} ℅
 5. यदि x का मान y से r% कम हो, तो y का मान x से अधिक है। 
              = {r/100-r × 100} ℅
 6. यदि किसी वस्तु की कीमत में r% की वृद्धि हो, तो खर्च में वृद्धि न होने के लिए वस्तु की खपत में कमी
             = {r/100+r × 100} ℅
 7. यदि किसी वस्तु की कीमत में r% की कमी हो , तो खर्च में कमी न होने के लिए वस्तु की खपत में वृद्धि 
             = {r/100-r × 100} ℅

शुक्रवार, 5 अप्रैल 2019

अनुपात तथा समानुपात के महत्त्वपूर्ण तथ्य एवं सूत्र - Important facts and sources of Ratio and proportion

Important facts and sources of Ratio and proportion (अनुपात तथा समानुपात के महत्त्वपूर्ण तथ्य एवं सूत्र)

अनुपात तथा समानुपात (Ratio and proportion)

अनुपात (Ratio)

      दो समान राशियों के तुलनात्मक अध्ययन को अनुपात कहते हैं। यदि a तथा b दो अशून्य संख्याएँ हैं, तो a तथा b के अनुपात को a : b द्वारा निरूपित करते हैं तथा a अनुपात b पढ़ते हैं।
   

समानुपात (Proportion) 

      यदि चार अशून्य संख्याएँ a, b, c तथा d इस प्रकार हैं, कि a : b = C : d, तो a, b,  तथा d समानुपात में है।
       यदि a : b : : C : d हो, तो ad = bc इसमें a तथा d को बाह्य पद तथा b और c को मध्य पद कहते हैं।
     
समानुपात से सम्बन्धित महत्त्वपूर्ण परिणाम (Important Results Related to Proportion) 
• यदि a, b, c, d चार अशून्य राशियाँ हैं, तो
  1. a : b : : c : d = b : a : : d : c (व्युत्क्रमानुपात)
  2. a : b : : c : d = a : c : : b : d (एकान्तरानुपात)
  3. a : b : : c : d = (a + b) : b : : (C + d) : d (योगानुपात)
  4. a : b : : c : d = (a - b) : b : : (c - d) : d (अन्तरानुपात)
  5. a : b : : c : d = (a + b) : (a - b) : : (c + d) : (c - d) ( योगान्तरानुपात )

चतुर्थानुपाती (Fourth Proportional) 

      यदि चार अशून्य राशियाँ a, b, c तथा d समानुपात में हैं, तो d को a, b, c का चतुर्थानुपाती कहते हैं।
   

वितत् समानुपात (Continued Proportion)  

      तीन अशून्य संख्याएँ a, b तथा c वितत् समानुपात में होंगी,
      यदि        a / b = b / c
      यदि a , b , c वितत् समानुपात में है, तो
                    b² = ac
      यहाँ b को मध्यानुपाती कहते हैं तथा c को तृतीयानुपाती कहते हैं।

महत्त्वपूर्ण तथ्य एवं सूत्र

• यदि A : B = a : b तथा B : C = m : n हो, तो A : B : C = am : mb : nb तथा A : C = am : bn 
• यदि A : B = a : b, B : C = c : d तथा C : D = e : f हो, तो A : B : C : D = ace : bce : bde : bdf
• यदि X को a : b के अनुपात में बाँटे, तो पहला भाग = a/a+b × x तथा दूसरा भाग
       = b/a+b × x

गुरुवार, 4 अप्रैल 2019

औसत के महत्त्वपूर्ण सूत्र और स्मरणीय बिन्दु - Significant sources of average and memorable points

Significant sources of average and memorable points (औसत के महत्त्वपूर्ण सूत्र और स्मरणीय बिन्दु)

औसत (Average) 

        किन्हीं समान राशियों का औसत वह संख्या है, जो उन राशियों के योगफल को उनकी कुल संख्या से भाग देने पर प्राप्त होती है, 
        
        औसत = राशियो का योग / कुल राशियों की संख्या 
       
औसत को मध्यमान या माध्य (mean) भी कहते हैं।

स्मरणीय बिन्दु

1. यदि किसी राशि का मान शून्य हो, तो उसे भी गणना में सम्मिलित किया जाता है। 
    जैसे - 2, 3, 0, 5, 10 का औसत 4 है। 
    
2. औसत तथा राशियों की संख्या का गुणनफल, राशियों के योग के बराबर होता है अर्थात् औसत × राशियों की संख्या = राशियों का योग।
    जैसे - यदि राशियाँ 5, 10, 15 हों, तो औसत = 5 + 10 + 15 / 3 = 10 
    तथा औसत × राशियों की संख्या = 10 × 3 = 30
     एवं राशियों का योग = 5 + 10 + 15 = 30 
     
3. प्रथम से लगातार n तक की प्राकृत संख्याओं का औसत = n + 1 / 2

4. प्रथम से लगातार n तक की पूर्ण संख्याओं का औसत = n / 2

5. प्रथम से लगातार n सम संख्याओं का औसत = n + 1 

6. प्रथम से लगातार n तक की सम संख्याओं का औसत = n + 2 / 2

7. प्रथम से लगातार n तक की विषम संख्याओं का औसत = n + 1 / 2

8. प्रथम लगातार n विषम संख्याओं का औसत = n 

9. लगातार n पूर्ण संख्याओं का औसत = n - 1 / 2

10. लगातार n सम संख्याओं के वर्गों का औसत = 2 (n + 1) (2n + 1) / 3

11. लगातार n तक की सम संख्याओं के वर्गों का औसत = (n + 1) (n + 2) / 3 

12. लगातार n तक की विषम संख्याओं के वर्गों का औसत = n (n + 2) / 3

13. लगातार n तक की प्राकृत संख्याओं के वर्गों का औसत = (n + 1) (2n + 1) / 6

14. लगातार n तक की प्राकृत संख्याओं के घनों का औसत = n (n + 1)² / 4

15. यदि दो गाड़ियाँ समान दूरी क्रमशः x किमी / घण्टा तथा y किमी / घण्टा की चाल से चली हों, तो उनकी औसत चाल = 2xy / x + y

16. किसी समूह में एक व्यक्ति के शामिल हो जाने के बाद औसत आयु में 
       (i) वृद्धि होने पर 
       आने वाले व्यक्ति की उम्र = पहले का औसत + नई संख्या × औसत में वृद्धि
       (ii) कमी होने पर 
       आने वाले व्यक्ति की उम्र = पहले का औसत - नई संख्या × औसत में कमी

मंगलवार, 2 अप्रैल 2019

रैखिक समीकरण के महत्त्वपूर्ण युक्तियाँ - Linear Equation ke top tips

Linear Equation ke top tips (रैखिक समीकरण के महत्त्वपूर्ण युक्तियाँ)

रैखिक समीकरण ( Linear Equation ) 

रैखिक समीकरण (Linear Equation)

       रैखिक बहुपद वाली समीकरण जिसमें चर राशि की घात एक हो, ऐसी समीकरण को रैखिक समीकरण कहते हैं।

एक चर वाली रैखिक समीकरण (Linear Equation in One Variable)

       जिस रैखिक बहुपद समीकरण में चरों की संख्या एक होती है, उसे एक चर वाली रैखिक समीकरण कहते हैं|
     
       उदाहरण  2x + 3 = 7, y + 7 = 10
     

दो चर वाली रैखिक समीकरण (Linear Equation in Two Variables) 

       जिस रैखिक बहुपद समीकरण में चरों की संख्या दो होती हैं, उसे दो चर वाली रैखिक समीकरण या द्विचर समीकरण कहते हैं।
     
       उदाहरण  3x + 4y = 7, 4x + 3y = 9
     

रैखिक समीकरणों को हल करने की विधियाँ  (Methods of Solving Linear Equations)

        रैखिक समीकरणों को हल करने के लिए निम्नलिखित विधियों का प्रयोग किया जाता है।

    (i) विलोपन विधि (Elimination Method)
    (ii) प्रतिस्थापन विधि (Substitution Method)

1. विलोपन विधि (Elimination Method) इस विधि में दी गई दोनों समीकरणों में किसी एक अज्ञात राशि के गुणांक को बराबर करके दोनों समीकरणों को जोड़ते अथवा घटाते हैं जिससे समान गुणांक वाले पद कट जाएँ। प्राप्त एक अज्ञात राशि की समीकरण को हल करने पर प्राप्त राशि के मान को दी गई किसी एक समीकरण में रखकर दूसरी अज्ञात राशि का मान प्राप्त कर लेते हैं।

    उदाहरणार्थ
    समीकरण    11x - 5y + 61 = 0   .......(i)
    तथा               3x - 20y - 2 = 0   .......(ii)
 
    का विलोपन अथवा निराकरण विधि से हल करने के लिए सर्वप्रथम x के गुणांकों को समान करने हेतु समी (i) को 3 से तथा समी (ii) को 11 से गुणा करने पर ,
      3 × (11x - 5y + 61) = 0
                     33x - 15y = - 183    .......(iii) तथा 11 × (3x - 20y - 2) = 0
                     33x - 220y = 22     ........(iv)
                   
समी (iv) को (iii) में से घटाने पर,
                   205y + 205 = 0
   या                               y = - 1
   y का मान समी (ii) में प्रतिस्थापित करने पर,

                 3x - 20 ×(-1) - 2 = 0
                 3x = -18 या x = -6
 
अत: समीकरण का हल
                     x = -6, y = -1

  2. प्रतिस्थापन विधि (Substitution Method) इस विधि में किसी एक समीकरण से एक अज्ञात राशि का मान दुसरी अज्ञात राशि के पदों में ज्ञात करके दूसरी समीकरण में प्रतिस्थापित करते है। इस प्रकार प्राप्त एक अज्ञात राशि की समीकरण को हल करके उस मान को दूसरी समीकरण में प्रतिस्थापित करके दूसरी अज्ञात राशि का मान प्राप्त करते हैं।

      उदाहरणार्थ  हम निम्न समीकरण - निकाय पर विचार करते है।
                   2x - y = 3           .......(i)
                   4x - y = 5           .......(ii)
                 
x को अचर मानते हुए सभी (i) को y के लिए हल करने पर
                   y = 2x - 3           .......(iii)
                 
प्राप्त होता है। अब समी (iii) से प्राप्त y के मान को समी (ii) में प्रतिस्थापित करने पर,

             4x - (2x - 3) = 5       .......(iv)

अब समी (ii) में से y का निराकरण हो गया है। परिणाम में प्राप्त समी (iv) अकेले x में समीकरण है।
समी (iv) को सरल करने पर,
                      2x + 3 = 5
                               x = 1
      x का मान समी (i) में रखने पर,
                      2 - y = 3
                            y = - 1
                   
      इस प्रकार दिए गए समीकरण निकाय का हल है।
                         x = 1, y = - 1
                       

सोमवार, 1 अप्रैल 2019

महत्तम समापवर्तक तथा लघुत्तम समापवर्त्य के 5 महत्वपूर्ण तथ्य एवं सूत्र - HCF and LCM top 5 formula

HCF and LCM top 5 formula (महत्तम समापवर्तक तथा लघुत्तम समापवर्त्य के 5 महत्वपूर्ण तथ्य एवं सूत्र)

महत्तम समापवर्तक तथा लघुत्तम समापवर्त्य

महत्तम समापवर्तक (Highest Common Factor, HCF) 

       दो या दो से अधिक संख्याओं का म. स. वह अधिकतम संख्या होती है जो दी गई सभी संख्याओं को पूर्णत: विभाजित करता है।
       उदाहरण 18, 36 तथा 45 का म. स. 9 है, क्योकि 9 वह अधिकतम संख्या है, जो इन सभी संख्याओं को पूर्णतः विभाजित करती है।

महत्तम समापवर्तक ज्ञात करने की विधियों (Methods to Find out HCF) 

     महत्तम समापवर्तक ज्ञात करने की दो विधियाँ हैं
     1. गुणनखण्ड विधि (Factorization Method) 
     2. भाग विधि (Division method) 

लघुत्तम समापवर्त्य (Least Common Multiple, LCM) 

         वह छोटी से छोटी संख्या, जो दो या दो से अधिक संख्याओं में से प्रत्येक से पूर्णतया विभाजित हो जाता है, उन संख्याओं का लघुत्तम समापवर्त्य कहलाती हैं।
          उदाहरण 3, 5 का लघुत्तम समापवर्त्य 15 है।
       

 लघुत्तम समापवर्त्य ज्ञात करने की विधियाँ (Methods to Find out LCM) 

          लघुत्तम समापवर्त्य ज्ञात करने की दो विधियाँ हैं।
          1. गुणनखण्ड विधि (Factorization Method)  
          2. भाग विधि (Division Method)

महत्वपूर्ण तथ्य एवं सूत्र 

1. दशमलव संख्याओं का म. स. तथा ल. स. निकालने के लिए सर्वप्रथम सभी दी गई संख्याओं को समान दशमलव रूप में लिखते हैं। इन संख्याओं को प्राकृतिक संख्या मानकर इनका म. स. या ल. स. निकालते हैं। इसके बाद प्राप्त म. स. या ल. स. में दशमलव समान दशमलव रूप के अनुसार लगाया जाता है। 
2. यदि किन्ही संख्याओं में कोई उभयनिष्ठ गुणनखण्ड न हो, तो उनका म. स. 1 तथा ल. स. उनका गुणनफल होता है।
3. भिन्नों का ल. स. = अंशो का ल. स. / हरों का म. स. 
4. भिन्नों का म. स. = अंशो का म. स. / हरों का ल. स.
5. पहली संख्या × दूसरी संख्या = ल. स. × म. स.