Significant sources of average and memorable points (औसत के महत्त्वपूर्ण सूत्र और स्मरणीय बिन्दु)

औसत (Average) 

        किन्हीं समान राशियों का औसत वह संख्या है, जो उन राशियों के योगफल को उनकी कुल संख्या से भाग देने पर प्राप्त होती है, 
        
        औसत = राशियो का योग / कुल राशियों की संख्या 
       
औसत को मध्यमान या माध्य (mean) भी कहते हैं।

स्मरणीय बिन्दु

1. यदि किसी राशि का मान शून्य हो, तो उसे भी गणना में सम्मिलित किया जाता है। 
    जैसे - 2, 3, 0, 5, 10 का औसत 4 है। 
    
2. औसत तथा राशियों की संख्या का गुणनफल, राशियों के योग के बराबर होता है अर्थात् औसत × राशियों की संख्या = राशियों का योग।
    जैसे - यदि राशियाँ 5, 10, 15 हों, तो औसत = 5 + 10 + 15 / 3 = 10 
    तथा औसत × राशियों की संख्या = 10 × 3 = 30
     एवं राशियों का योग = 5 + 10 + 15 = 30 
     
3. प्रथम से लगातार n तक की प्राकृत संख्याओं का औसत = n + 1 / 2

4. प्रथम से लगातार n तक की पूर्ण संख्याओं का औसत = n / 2

5. प्रथम से लगातार n सम संख्याओं का औसत = n + 1 

6. प्रथम से लगातार n तक की सम संख्याओं का औसत = n + 2 / 2

7. प्रथम से लगातार n तक की विषम संख्याओं का औसत = n + 1 / 2

8. प्रथम लगातार n विषम संख्याओं का औसत = n 

9. लगातार n पूर्ण संख्याओं का औसत = n - 1 / 2

10. लगातार n सम संख्याओं के वर्गों का औसत = 2 (n + 1) (2n + 1) / 3

11. लगातार n तक की सम संख्याओं के वर्गों का औसत = (n + 1) (n + 2) / 3 

12. लगातार n तक की विषम संख्याओं के वर्गों का औसत = n (n + 2) / 3

13. लगातार n तक की प्राकृत संख्याओं के वर्गों का औसत = (n + 1) (2n + 1) / 6

14. लगातार n तक की प्राकृत संख्याओं के घनों का औसत = n (n + 1)² / 4

15. यदि दो गाड़ियाँ समान दूरी क्रमशः x किमी / घण्टा तथा y किमी / घण्टा की चाल से चली हों, तो उनकी औसत चाल = 2xy / x + y

16. किसी समूह में एक व्यक्ति के शामिल हो जाने के बाद औसत आयु में 
       (i) वृद्धि होने पर 
       आने वाले व्यक्ति की उम्र = पहले का औसत + नई संख्या × औसत में वृद्धि
       (ii) कमी होने पर 
       आने वाले व्यक्ति की उम्र = पहले का औसत - नई संख्या × औसत में कमी