कराधान (Taxation) किसे कहते है | कराधान का अर्थ क्या हैं - karaadhaan (taxation) kise kahate hai | karaadhaan ka arth kya hain

कराधान (Taxation)

      किसी भी सरकार (केन्द्र अथवा राज्य) को देश अथवा राज्य चलाने (कानून व्यवस्था, अच्छी शिक्षा का प्रबन्ध, नागरिकों को सुरक्षा प्रदान करने, उचित न्याय दिलाने, देश की रक्षा करने, इत्यादि कार्यो) हेतु धन की आवश्यकता पड़ती है। सरकार इन खर्चे को पूरा करने के लिए विभिन्न माध्यमों के जरिए धन की उगाही करती है। कराधान भी सरकार द्वारा धन संग्रह का एक कार्य है, जो देश को सुचारू रूप से चलाने के लिए आवश्यक है। भारत में राजस्व विभाग, राजस्व से संबंधित प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कर के मामलों पर दो संवैधानिक बोर्डो - केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड और केन्द्रीय उत्पाद एवं सीमा शुल्क बोर्ड के माध्यम से नियंत्रण रखता है। करारोपण एवं कर - संग्रह की कुछ नियम एवं शर्ते होती हैं। कुछ मामलों में करों में छूट भी दी जाती है। इस अध्याय में विभिन्न परिस्थितियों के अनुरूप लगने वाले ऐसे ही करों की गणना से सम्बन्धित प्रश्नों का समाधान दिया गया है। कराधान के विभिन्न प्रश्नों को आसानी से हल करने के लिए निम्नलिखित तथ्यों को जानना आवश्यक है।

कर से सम्बन्धित महत्त्वपूर्ण तथ्य (Important Facts Related to Tax)


1. कर नागरिकों द्वारा सरकार के विविध क्रियाकलापों में व्यय करने हेतु किया गया योगदान है।

2. कर अनिवार्य योगदान है, किन्तु सामान्यत: इसका भुगतान व्यक्ति की इच्छानुसार ईमानदारीपूर्वक किया जाता है, एदि आवश्यक कर का भुगतान समय पर नहीं किया जाता है, तो इसे कर - चोरी कहा जाता है। कर चोरी एक दण्डनीय अपराध है।

3. सरकार द्वारा नागरिकों पर करारोपण केवल राजस्व में वृद्धि हेतु नहीं किया जाता बल्कि इसका उद्देश्य, प्राप्त धन की मदद से नागरिकों को सुरक्षा मुहैया कराना, देश की रक्षा करना, आर्थिक व्यवस्था को नियंत्रित करना एवं अन्य आवश्यक सुविधाएँ उपलब्ध करवाना होता है।

4. कर दो प्रकार के होते हैं।
(i) प्रत्यक्ष कर (Direct Tax) 
(ii) अप्रत्यक्ष कर (Indirect Tax)

5. किसी व्यक्ति अथवा समूह पर प्रत्यक्ष रूप से आरोपित कर प्रत्यक्ष कर कहलाता है। जैसे — उपहार कर, आयकर, निगम कर, ब्याज कर, प्रतिभूति संव्यवहार कर, बैकिंग रोकड़ संव्यवहार कर, सम्पत्ति कर इत्यादि।

6. किसी व्यक्ति अथवा समूह पर अप्रत्यक्ष रूप से आरोपित कर अप्रत्यक्ष कर कहलाता है, जैसे - बिक्री कर (Sales Tax), उत्पाद शुल्क (Excise Duty), सीमा शुल्क (Custon Duty), सेवा कर (Service Tax) इत्यादि।

7. व्यक्ति या व्यक्ति - समूह की आय पर लगाया गया कर आयकर (Income Tax) कहलाता है। आय के अनुसार आयकर की दरें सरकार द्वारा निर्धारित की जाती है।

8. जब उपहार का मूल्य सरकार द्वारा तय सीमा से अधिक होता है तो इस मूल्य पर उपहार कर (Gift Tax) देना पड़ता है।

9. किसी व्यक्ति की सम्पत्ति पर देय कर सम्पत्ति कर कहलाता है।

10. किसी वित्तीय वर्ष में आयकर पर देय अतिरिक्त कर अधिभार (Surcharge) कहलाता है।

 आयकर की गणना की चरणबद्ध विधि (Stepwise Method for Computation of Income Tax) 


 किसी वित्तीय वर्ष में किसी व्यक्ति के आयकर का परिकलन निम्नलिखित चरणों में किया जाता है

चरण (1) : व्यक्ति की उस वित्तीय वर्ष में सकल आय का परिकलन। 

चरण (2) : मानक एवं अन्य स्वीकार्य कटौतियों का परिकलन। (स्वीकार्य बचत, दान इत्यादि।)

चरण (3) : ₹10 के सन्निकट मान में कर योग्य आय का परिकलन।
              कर योग्य आय = सकल आय - (मानक  
                            कटौती + कटौती योग्य दान) 
           
चरण (4) : कर योग्य आय पर दिए गए वर्ष की कर दर के हिसाब से कर की गणना (₹1 के निकट तक)

चरण (5) : कर की छूट के लिए स्वीकार्य जमा राशि का परिकलन।

चरण (6) : धारा 88 के अधीन स्वीकार्य कर की छूट का परिकलन।

चरण (7) : नेट देय कर की गणना।
                नेट देय कर = कुल कर - कर में छूट
             
चरण (8) : यदि कोई अधिभार (Surcharge) हैं तो उसकी गणना।

चरण (9) : ₹1 के सन्निकट मान में कुल देय कर को गणना।
                कुल देय कर = चरण (7) की राशि +     
                                     चरण (8) की राशि

चरण (10) : वित्तीय वर्ष में यदि पहले से ही कोई आयकर दिया जा चुका है तो उसकी गणना।

चरण (11) : चरण (10) में प्राप्त कर में से चरण (9) में प्राप्त कर को घटाना।

चरण (12) : चरण (11) में प्राप्त शेष कर की राशि वित्तीय वर्ष के अन्तिम माह में दिया जाने वाला कर है।
स्मरणीय बिन्दु

1. वित्तीय वर्ष (Financial Year) 1 अप्रैल से 31 मार्च तक की अवधि एक वित्तीय वर्ष कहलाती है। इसी अवधि पर आयकर, व्ययकर इत्यादि की गणना की जाती है।

2. सकल आय (Gross Income) सभी स्रोतों से एक वित्तीय वर्ष में हुई आय उस वर्ष की सकल आय कहलाती है।

3. स्वीकार्य कटौती (Acceptable Deduction) आयकर से मुक्त कटौतिया स्वीकार्य कटौतियाँ कहलाती हैं । कुछ महत्त्वपूर्ण कटौतियाँ हैं।

 (i) मानक कटौती (Standard Deduction) किसी वित्तीय वर्ष में मानक कटौती की व्यक्ति विशेष के अनुसार अधिकतम सीमा तय होती है।
 (ii) मकान किराया भत्ता (House Rent Allowance) वेतनभोगी व्यक्तियों का कुछ शर्तों के अनुसार मकान किराए भत्ते का कुछ अंश आयकर से मुक्त होता हैं।
 (iii) धारा 80G के आधार पर निम्नलिखित निधियों में दिए गए धन को आयकर से मुक्त रखा गया है
 (a) प्रधानमन्त्री राहत निधि 
 (b) राष्ट्रीय रक्षा निधि 
 (c) आयुर्विज्ञान अनुसन्धान में दान 
 (d) परमार्थ संस्थाओं को देय राशि 

 (iv) वरिष्ठ नागरिकों को आयकर में छूट  वरिष्ठ नागरिकों को 2 लाख 40 हजार रुपये तक की वार्षिक आय पर आयकर में 100 % छूट दी गई है।

(v) महिलाओं को आयकर में छूट  महिलाओं को 1 लाख 90 हजार रुपये तक की वार्षिक आय पर आयकर में 100 % छूट दी गई है।

(vi) विभिन्न प्रकार की बचतों में आयकर से छूट  यदि कोई व्यक्ति अपनी वार्षिक आय में से निम्नलिखित मदों में खर्च करता है तो इन मदों में खर्च राशि पर आयकर में छूट दी जाती है।
(a) जीवन बीमा प्रीमियम (Life Insurance)
(b) भविष्य निधि (Provident Fund) 
(c) लोक भविष्य निधि (Public Provident Fund) 
(d) यूलिप ( ULIP ) 
(e) राष्ट्रीय बचत पत्र (NSC) / राष्ट्रीय बचत योजना (NSS)