मंगलवार, 28 मई 2019

गति के नियम (Laws of Motion)


गति के नियम (Laws of Motion)

गति के नियम (Laws of Motion)

बल (Force)
      बल वह बाह्य कारक है जो किसी वस्तु की विराम अथवा गति अवस्था में परिवर्तन करता है या परिवर्तन करने का प्रयास करता है। बल दो प्रकार के होते हैं।
      1. सन्तुलित बल
      2. असन्तुलित बल
     
1. सन्तुलित बल (Balanced Force) 
      जब किसी वस्तु पर एक साथ कई बल कार्य कर रहे हो तथा उनका परिणामी बल शून्य हो तो बलों को सन्तुलित बल कहते हैं।
     
2. असन्तुलित बल (Unbalanced Force) 
      जब वस्तु पर लगे बलों का परिणामी बल शून्य न हो तब बलों को असन्तुलित बल कहते हैं।

न्यूटन के गति के नियम (Newton's Laws of Motion)

प्रथम नियम (First Law) 
      यदि कोई वस्तु विरामावस्था में है या समान वेग से गतिमान है तो उसकी विरामावस्था या समान गति की अवस्था में परिवर्तन तभी होता है जब उस पर कोई असन्तुलित बल कार्य करता है। इस नियम को 'जड़त्व का नियम' (law of inertia) भी कहते हैं।
     
द्वितीय नियम (Second Law) 
      किसी वस्तु पर लगाया गया बल F, उस वस्तु के द्रव्यमान m, तथा वस्त में उत्पन्न त्वरण (a) के गुणनफल के अनुक्रमानुपाती होता है।
     

      जहाँ k एक नियतांक है (k = 1)
                      F = ma
                   बल = द्रव्यमान x त्वरण
                 
बल का मात्रक न्यूटन तथा सी०जी०एस० (CGS) पद्धति में डाइन होता है।
             1 न्यूटन = 10⁵ डाइन
           
तृतीय नियम (Third Law) 
      प्रत्येक क्रिया की उसके समान परन्तु विपरीत दिशा में प्रतिक्रिया होती है।
     
संवेग (Momentum) 
      किसी वस्तु के द्रव्यमान तथा वेग के गुणनफल को वस्तु का संवेग कहते हैं।
     
                 संवेग = द्रव्यमान x वेग
                      p = mv
                     
 इसका मात्रक किग्रा - मी/से अथवा न्यूटन/से होता है।

संवेग परिवर्तन तथा बल में सम्बन्ध (Relation between Force and Change in Momentum) 

बल का आवेग (Impulse of Force) 
      यदि कोई बल (F) किसी वस्तु पर अल्प समय (t) के लिये कार्य करे तो बल और समय के गुणनफल को बल का आवेग कहते हैं।
    .·.    बल का आवेग = बल × समयान्तराल
                              I = F × t
     या                      I = (mv - mu / t) × t
                              I = m (v - u)
 अत: बल का आवेग संवेग परिवर्तन के बराबर होता है। इसका मात्रक भी किग्रा - मी/से अथवा न्यूटन/से होता है।

प्रतिरोधक बल (Resistance Force) 
      यदि कोई पिण्ड बालू रेत आदि पर गिरता है तो वह अपने भार w (= mg) के कारण बालू रेत में धंसता जाता है परन्तु रेत द्वारा आरोपित प्रतिरोधक बल R के कारण वह कुछ दूर धंस कर रूक जाता है। यदि बल R के कारण उत्पन्न मन्दन a हो तो न्यूटन के दूसरे नियम के अनुसार नैट बल
     
                       R - mg = m × a
                     
एक किलोग्राम भार बल 
      यह वह बल है जिसके द्वारा पृथ्वी 1 किग्रा द्रव्यमान की वस्तु को ऊध्र्वाधरतः अपनी ओर आकर्षित करती है।
      अतः m किग्रा भार बल = m × g
                                   w = mg
                1 किलोग्राम बल = 9.8 न्यूटन
               
संवेग संरक्षण का नियम (Conservation of Momentum) 
      इस नियम के अनुसार, दो गोलो के टकराने पर टक्कर से पहले के संवेगों का योग तथा टकराने के बाद उनके संवेगों का योग बराबर रहता है।
       यदि m₁ तथा m₂ द्रव्यमानों के दो गोलो के वेग क्रमशः u₁ तथा u₂ हैं जो टकराने के पश्चात् क्रमशः v₁ तथा v₂ हो जाते हैं, तो

        m₁u₁ + m₂u₂ = m₁v₁ + m₂v₂
       
      यदि किसी वस्तु पर बाह्य बल शून्य हो, तो वस्तु का प्रारम्भिक व अन्तिम संवेग बराबर होते है अर्थात् संवेग नियत रहता है। यह संवेग संरक्षण का सिद्धान्त है।
      यदि टक्कर के पश्चात् दोनों पिण्ड संयुक्त होकर एक हो जाते हैं और उनका उभयनिष्ठ वेग v हो जाता है तो

         (m₁ + m₂) v = m₁u₁ + m₂u₂
  या                      v = m₁u₁ + m₂u₂ / m₂ + m₁

  यदि पिण्ड टक्कर से पहले विपरीत दिशा में चल रहे हों तब, 
                      v = m₁u₁ - m₂u₂ / m₁ + m₂

बन्दूक और गोली की गति (Motion of Gun and Bullet) 
      जब बन्दूक से गोली छोड़ी जाती है तो बन्दूक गोली को अत्यधिक वेग से आगे फेकती है। इससे गोली में आगे की दिशा में संवेग उत्पन्न हो जाता है। गोली भी बन्दूक पर प्रतिक्रिया बल लगाती है जिसके फलस्वरूप बन्दूक में पीछे की दिशा में उतना ही संवेग उत्पन्न हो जाता है और बन्दूक पीछे हटती है। परन्तु बन्दूक का द्रव्यमान गोली की अपेक्षाकृत अधिक होता है। अतः वेग बहुत कम होता है।
      यदि m द्रव्यमान की गोली u वेग से बन्दूक से बाहर निकलती है और M द्रव्यमान की बन्दूक v वेग से पीछे हटती है तो
      बन्दूक में उत्पन्न संवेग = गोली में उत्पन्न संवेग अर्थात्
                     M × v = m × u
                             v = m × u / M

लिफ्ट में खड़े व्यक्ति का भार (Weight of a Man in a lift)  
 
1. यदि लिफ्ट विरामावस्था में है।
                             R = mg
          अर्थात् व्यक्ति के भार में किसी परिवर्तन का अनुभव नहीं होगा।
         
2. यदि लिफ्ट a त्वरण से ऊपर जा रही है।
                     R - mg = ma
                              R = m (g + a)
    अर्थात् भार बढ़ा हुआ प्रतीत होगा
   
3. यदि लिफ्ट a त्वरण से नीचे आ रही हो
                      mg - R = ma
                               R = m(g - a)
    अर्थात् भार घटा हुआ प्रतीत होगा
   
4 . यदि लिफ्ट की डोरी टूट जाये तो वह g त्वरण से नीचे गिरेगी
                              R = 0
     अर्थात् व्यक्ति को अपना भार शून्य प्रतीत होगा।

सोमवार, 6 मई 2019

गति (Motion) के नियम के top 13 सूत्र - what is motion

 गति (Motion) के नियम के top 13 सूत्र - what is motion

गति (Motion)

दूरी तथा विस्थापन (Distance and Displacement)
      किसी गतिमान वस्तु द्वारा किसी समय में किसी भी दिशा में तय की गई लम्बाई को उस वस्तु द्वारा चली गई दूरी कहते हैं।
      जबकि वस्तु की अन्तिम तथा प्रारम्भिक स्थितियों के बीच की दूरी को विस्थापन कहते हैं।
       किसी वस्तु द्वारा चली गई दूरी शून्य नहीं हो सकती जबकि विस्थापन शून्य हो सकता है।
     
चाल (Speed) 
       किसी वस्तु द्वारा एकांक समयान्तराल में चली दूरी उस वस्तु की चाल कहलाती है। इसे u से प्रदर्शित करते हैं।
     
       चाल u = दूरी (∆s) / समयान्तराल (∆t)
     
चाल एक अदिश राशि है। इसका मात्रक SI प्रणाली में मीटर / सेकण्ड होता है।

वेग (Velocity)
      किसी वस्तु द्वारा एकांक समयान्तराल में तय किया गया विस्थापन उस वस्तु का वेग कहलाता है। वेग एक सदिश राशि है। SI प्रणाली में वेग का मात्रक मीटर / सेकण्ड होता है। दिशा तथा परिमाण (चाल) में से किसी एक के बदलने से वेग भी परिवर्तित हो जाता है।
      जैसे — वृत्तीय पथ पर एकसमान चाल से गतिमान वस्तु का वेग दिशा बदलने के कारण बदलता रहता है।
     
      वेग (v) = विस्थापन (∆⃗s) वेग / समयान्तराल (∆t)
     
औसत चाल तथा औसत वेग (Average Speed and Average Velocity) 
      किसी गतिमान वस्तु द्वारा एकांक समय में तय की गई औसत दूरी को औसत चाल कहते हैं।
     
       औसत चाल = कुल दूरी / कुल समय

      किसी वस्तु द्वारा एकांक समय में तय किये गये कुल विस्थापन को वस्तु का औसत वेग कहते हैं।
     
       औसत वेग = कुल विस्थापन / कुल समय
     
त्वरण (Acceleration) 
      वेग - परिवर्तन की दर को त्वरण कहते हैं।
     
      त्वरण = वेग - परिवर्तन / परिवर्तन में लगा समय

      यदि वस्तु के वेग में बराबर समयान्तरालों में बराबर परिवर्तन हो रहा है तो उसका त्वरण एकसमान कहलाता है।
      यदि वस्तु के वेग का परिमाण समय के साथ बढ़ रहा है तो वस्तु का त्वरण धनात्मक होता है।
       यदि वस्तु के वेग का परिमाण समय के समय घट रहा है तो त्वरण ऋणात्मक होता है इसे मन्दन (retardation) कहते हैं।
     
गति के समीकरण (Equations of Motion)
       यदि किसी वस्तु का प्रारम्भिक वेग u तथा एकसमान त्वरण a है तो t समय में s दूरी तय करने के पश्चात् वस्तु का वेग v हो जाता है।
     
       (i) v = u + at
       (ii) s = ut + 1/2 at²
       (iii) v² = u² + 2as
       (iv) Sₜ = u + 1/2 a(2t - 1)
     
नोट - [Sₜ = t वे सेकण्ड में चली दूरी]

1. यदि मन्दन है तो त्वरण का मान ऋणात्मक लेगें।
2. यदि पिण्ड एकसमान वेग से गतिमान हो तो a = 0 लेते हैं।
3. यदि वस्तु विरामावस्था से चलना प्रारम्भ करती है तो उसका प्रारम्भिक वर्ग u = 0 होता है।
4. यदि वस्तु अन्त में रूक जाती है तो अन्तिम वेग शून्य होता है।

गुरुत्व के अन्तर्गत गति (Motion Under Gravity) 
      ऊर्ध्वाधर ऊपर नीचे गति करती हुई वस्तु के लिये
       v = u ± gt
       h = ut ± 1/2 gt²
       v² = u² ± 2gh
       Sₜ = u ± 1/2 g(2t - 1)

जब वस्तु ऊपर से ऊर्ध्वाधर नीचे की ओर गिरती है तो g का मान धनात्मक लेते हैं।
जब वस्तु ऊर्ध्वाधर ऊपर की ओर फेंकी जाती है तो g का मान ऋणात्मक लेते हैं। g का मान प्रायः 9.8 मी/से² होता है।

विशेष बिन्दु 

      किसी वस्तु की किमी / घण्टा की चाल को मी/से में बदलने के लिए 5/18 से गुणा करते हैं।
      किसी वस्तु की मी/से की चाल को किमी / घण्टा में बदलने के लिये 18/5 से गुणा करते हैं।          

शुक्रवार, 3 मई 2019

सदिश राशि ट्रिक | सदिश राशि के प्रकार - sadish raashi trik | sadish raashi ke prakaar

सदिश राशि ट्रिक | सदिश राशि के प्रकार - sadish raashi trik | sadish raashi ke prakaar

सदिश राशियाँ (Vector Quantities)

भौतिक राशियाँ (Physical Quantities)

      भौतिक राशियाँ दो प्रकार की होती हैं।
     
1. अदिश राशियाँ (Scalar Quantities)
           जिन राशियों को व्यक्त करने के लिए केवल परिमाण की आवश्यकता होती है। दिशा की नहीं अर्थात् ये राशियाँ दिशा परिवर्तन के कारण परिवर्तित नहीं होती हैं, इन्हें अदिश राशि कहते हैं।
            जैसे - लम्बाई, दूरी, द्रव्यमान, क्षेत्रफल, समय, चाल, कार्य, ऊर्जा, दाब, ताप, घनत्व, आयतन, विद्युत धारा आदि। 
           
2. सदिश राशियाँ (Vector Quantities)
           जिन राशियों को व्यक्त करने के लिए परिमाण एवं दिशा दोनों की आवश्यकता होती है अर्थात् ये राशियाँ दिशा परिवर्तन के कारण परिवर्तित हो जाती हैं इन्हें, सदिश राशियाँ कहते हैं।
           जैसे — विस्थापन, वेग, त्वरण, बल, संवेग, आवेग, भार, विद्युत क्षेत्र आदि।

 अदिश राशियों को बीजगणित के साधारण नियमों के अनुसार जोड़ा अथवा घटाया जा सकता है। सदिश राशियों को बीजगणित के साधारण नियमों के अनुसार जोड़ा अथवा घटाया नहीं जा सकता है।

3. सदिश निरूपण (Vector Notation) 
          सदिश राशियों को तीर द्वारा निरूपित किया जाता है। तीर की नोंक जिसे बाणाग्र (head) कहते हैं सदिश की दिशा को व्यक्त करती है तथा तीर की लम्बाई। सदिश के परिमाण को व्यक्त करती है।
         
 सदिश A को ⃗A से निरूपित करते हैं।


 सदिश राशियों से सम्बन्धित महत्वपूर्ण बिंदु (Important Points Regarding Vectors Quantities)  

शून्य सदिश (Zero or Null Vector) 
       ऐसा सदिश जिसका परिमाण शून्य हो, शून्य सदिश कहलाता है। इसकी दिशा अनिश्चित होती है।
     
                            ⃗⃗A = ⃗B
                      ⃗A - ⃗B = ⃗⃗0

एकांक सदिश (Unit Vector)
       वह सदिश जिसका परिमाण 1 होता है एकांक सदिश कहलाता है। यदि ⃗A एक सदिश है जिसकी दिशा ⃗A की दिशा में है, तब ⃗A की दिशा में एकांक वेक्टर को ⃗A से लिखा जाता है। इस प्रकार
                   
                        ⃗A = ⃗A /A

सदिशों का योग (Addition of Vectors)
      यदि दोनों सदिश ⃗A तथा ⃗B एक ही दिशा में हैं तो दोनों सदिशों का योग ⃗R = ⃗A + ⃗B होगा और यदि सदिश ⃗B सदिश ⃗A के विपरीत दिशा में है तो दोनों सदिश सदिशों का योग ⃗R = ⃗A + (- ⃗B ) = ⃗A - ⃗B होगा।
     
समान्तर चतुर्भुज का नियम (The Parallelogram Law)
      यदि दो सदिश ⃗A तथा ⃗B परस्पर कोण पर कार्य कर रहे हैं तब सदिशों का परिणामी सदिश