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गति के नियम (Laws of Motion)

गति के नियम (Laws of Motion)
गति के नियम (Laws of Motion)

बल (Force)
      बल वह बाह्य कारक है जो किसी वस्तु की विराम अथवा गति अवस्था में परिवर्तन करता है या परिवर्तन करने का प्रयास करता है। बल दो प्रकार के होते हैं।
      1. सन्तुलित बल
      2. असन्तुलित बल
     
1. सन्तुलित बल (Balanced Force) 
      जब किसी वस्तु पर एक साथ कई बल कार्य कर रहे हो तथा उनका परिणामी बल शून्य हो तो बलों को सन्तुलित बल कहते हैं।
     
2. असन्तुलित बल (Unbalanced Force) 
      जब वस्तु पर लगे बलों का परिणामी बल शून्य न हो तब बलों को असन्तुलित बल कहते हैं।

न्यूटन के गति के नियम (Newton’s Laws of Motion)

प्रथम नियम (First Law) 
      यदि कोई वस्तु विरामावस्था में है या समान वेग से गतिमान है तो उसकी विरामावस्था या समान गति की अवस्था में परिवर्तन तभी होता है जब उस पर कोई असन्तुलित बल कार्य करता है। इस नियम को ‘जड़त्व का नियम’ (law of inertia) भी कहते हैं।
     
द्वितीय नियम (Second Law) 
      किसी वस्तु पर लगाया गया बल F, उस वस्तु के द्रव्यमान m, तथा वस्त में उत्पन्न त्वरण (a) के गुणनफल के अनुक्रमानुपाती होता है।
     

      जहाँ k एक नियतांक है (k = 1)
                      F = ma
                   बल = द्रव्यमान x त्वरण
                 
बल का मात्रक न्यूटन तथा सी०जी०एस० (CGS) पद्धति में डाइन होता है।
             1 न्यूटन = 10⁵ डाइन
           
तृतीय नियम (Third Law) 
      प्रत्येक क्रिया की उसके समान परन्तु विपरीत दिशा में प्रतिक्रिया होती है।
     
संवेग (Momentum) 
      किसी वस्तु के द्रव्यमान तथा वेग के गुणनफल को वस्तु का संवेग कहते हैं।
     
                 संवेग = द्रव्यमान x वेग
                      p = mv
                     
 इसका मात्रक किग्रा – मी/से अथवा न्यूटन/से होता है।

संवेग परिवर्तन तथा बल में सम्बन्ध (Relation between Force and Change in Momentum) 

बल का आवेग (Impulse of Force) 
      यदि कोई बल (F) किसी वस्तु पर अल्प समय (t) के लिये कार्य करे तो बल और समय के गुणनफल को बल का आवेग कहते हैं।
    .·.    बल का आवेग = बल × समयान्तराल
                              I = F × t
     या                      I = (mv – mu / t) × t
                              I = m (v – u)
 अत: बल का आवेग संवेग परिवर्तन के बराबर होता है। इसका मात्रक भी किग्रा – मी/से अथवा न्यूटन/से होता है।

प्रतिरोधक बल (Resistance Force) 
      यदि कोई पिण्ड बालू रेत आदि पर गिरता है तो वह अपने भार w (= mg) के कारण बालू रेत में धंसता जाता है परन्तु रेत द्वारा आरोपित प्रतिरोधक बल R के कारण वह कुछ दूर धंस कर रूक जाता है। यदि बल R के कारण उत्पन्न मन्दन a हो तो न्यूटन के दूसरे नियम के अनुसार नैट बल
     
                       R – mg = m × a
                     
एक किलोग्राम भार बल 
      यह वह बल है जिसके द्वारा पृथ्वी 1 किग्रा द्रव्यमान की वस्तु को ऊध्र्वाधरतः अपनी ओर आकर्षित करती है।
      अतः m किग्रा भार बल = m × g
                                   w = mg
                1 किलोग्राम बल = 9.8 न्यूटन
               
संवेग संरक्षण का नियम (Conservation of Momentum) 
      इस नियम के अनुसार, दो गोलो के टकराने पर टक्कर से पहले के संवेगों का योग तथा टकराने के बाद उनके संवेगों का योग बराबर रहता है।
       यदि m₁ तथा m₂ द्रव्यमानों के दो गोलो के वेग क्रमशः u₁ तथा u₂ हैं जो टकराने के पश्चात् क्रमशः v₁ तथा v₂ हो जाते हैं, तो

        m₁u₁ + m₂u₂ = m₁v₁ + m₂v₂
       
      यदि किसी वस्तु पर बाह्य बल शून्य हो, तो वस्तु का प्रारम्भिक व अन्तिम संवेग बराबर होते है अर्थात् संवेग नियत रहता है। यह संवेग संरक्षण का सिद्धान्त है।
      यदि टक्कर के पश्चात् दोनों पिण्ड संयुक्त होकर एक हो जाते हैं और उनका उभयनिष्ठ वेग v हो जाता है तो

         (m₁ + m₂) v = m₁u₁ + m₂u₂
  या                      v = m₁u₁ + m₂u₂ / m₂ + m₁

  यदि पिण्ड टक्कर से पहले विपरीत दिशा में चल रहे हों तब, 
                      v = m₁u₁ – m₂u₂ / m₁ + m₂

बन्दूक और गोली की गति (Motion of Gun and Bullet) 
      जब बन्दूक से गोली छोड़ी जाती है तो बन्दूक गोली को अत्यधिक वेग से आगे फेकती है। इससे गोली में आगे की दिशा में संवेग उत्पन्न हो जाता है। गोली भी बन्दूक पर प्रतिक्रिया बल लगाती है जिसके फलस्वरूप बन्दूक में पीछे की दिशा में उतना ही संवेग उत्पन्न हो जाता है और बन्दूक पीछे हटती है। परन्तु बन्दूक का द्रव्यमान गोली की अपेक्षाकृत अधिक होता है। अतः वेग बहुत कम होता है।
      यदि m द्रव्यमान की गोली u वेग से बन्दूक से बाहर निकलती है और M द्रव्यमान की बन्दूक v वेग से पीछे हटती है तो
      बन्दूक में उत्पन्न संवेग = गोली में उत्पन्न संवेग अर्थात्
                     M × v = m × u
                             v = m × u / M

लिफ्ट में खड़े व्यक्ति का भार (Weight of a Man in a lift)  
 
1. यदि लिफ्ट विरामावस्था में है।
                             R = mg
          अर्थात् व्यक्ति के भार में किसी परिवर्तन का अनुभव नहीं होगा।
         
2. यदि लिफ्ट a त्वरण से ऊपर जा रही है।
                     R – mg = ma
                              R = m (g + a)
    अर्थात् भार बढ़ा हुआ प्रतीत होगा
   
3. यदि लिफ्ट a त्वरण से नीचे आ रही हो
                      mg – R = ma
                               R = m(g – a)
    अर्थात् भार घटा हुआ प्रतीत होगा
   
4 . यदि लिफ्ट की डोरी टूट जाये तो वह g त्वरण से नीचे गिरेगी
                              R = 0
     अर्थात् व्यक्ति को अपना भार शून्य प्रतीत होगा।

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