जगन्नाथ पुरी रथ यात्रा 2019 | रथ यात्रा क्यों मनाया जाता है - jagannaath puree rath yaatra 2019 | rath yaatra kyon manaaya jaata hai
 रथ यात्रा

रथ यात्रा (Rather yatra)

रथ यात्रा का पर्व भारत के प्रमुख पर्वों में से एक है और देश भर में इसे काफी श्रद्धा तथा हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है परन्तु इसका सबसे भव्य आयोजन उड़ीसा राज्य के जगन्नाथपुरी में देखने को मिलता है। पुरी स्थित जगन्नाथपुरी मंदिर भारत के चार धामो में से एक है।
यह भारत के सबसे प्राचीन मंदिरों में से भी एक है और यहां भगवान श्रीकृष्ण, बलराम और उनकी बहन देवी सुभद्रा की पूजा की जाती है। यह रथ यात्रा आषाढ़ माह की शुक्लपक्ष की द्वितीया तिथि को आरम्भ होती है। इस दिन भारी संख्या में भक्तगण रथ यात्रा उत्सव में सम्मिलित होने के लिए देश-विदेश से पुरी खिंचे चले आते हैं।




रथ यात्रा क्यों मनाया जाता है? (Why Do We Celebrate Rath Yatra)


पुराणों में जगन्नाथ पुरी को धरती का बैकुंठ कहा गया है. ब्रह्म और स्कंद पुराण के अनुसार, पुरी में भगवान विष्णु ने पुरुषोत्तम नीलमाधव के रूप में अवतार लिया था. वह यहां सबर जनजाति के परम पूज्य देवता बन गए.आषाढ़ महीने की द्वितीय तिथि को भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा का उत्सव मनाया जाता है. अहमदाबाद में रथयात्रा का शुभारंभ भगवान जगन्नाथ के मुख्य मंदिर से शुरू होता है, जिसके बाद ये रथयात्रा सरसपुर के रणछोड़दास मंदिर तक जाती है। इसके अलावा ओडिशा के पुरी में भी भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा शुरू हो जाती है।


इस यात्रा में भगवान जगन्नाथ को साल में एक बार उनके गर्भ गृह से निकालकर यात्रा कराई जाती है. भगवान जगन्नाथ के साथ भगवान कृष्ण, उनके भाई बलराम और बहन सुभद्रा को भी रथ में बैठाकर यात्रा कराई जाती है। ये उत्सव पूरे 9 दिनों तक मनाया जाता है. यात्रा के पीछे यह मान्यता है कि भगवान अपने गर्भ गृह से निकलकर प्रजा के सुख-दुख को खुद देखते है।




रथ यात्रा का महत्व (Significance of Rath Yatra)


हिंदू धर्म के चार धामों में जगन्नाथ पुरी (Jagannath Puri) बहुत महत्व रखता है, अन्य तीन हैं- बद्रीनाथ, द्वारिका और रामेश्वरम।  आदि शंकराचार्य जब यहां पधारे तो उन्होंने गोवर्धन मठ की स्थापना की। तब से पुरी को सनातन धर्म के चार धामों में एक माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि भगवान विष्णु पुरी में भोजन करते हैं, रामेश्वरम में स्नान करते हैं, द्वारका में शयन करते हैं और बद्रीनाथ में ध्यान करते हैं। पुरी में भगवान जगन्नाथ के दर्शन किए बिना धामों की यात्रा अधूरी मानी जाती है।