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Batla House full Movie Review in hindi – बाटला हाउस मूवी रिव्यू

क्रिटिक रेटिंग :- 3.5/5
पाठकों की रेटिंग :- 4/5अवधि :- 2 hours 26 minutes
निर्देशक :- रवि किशन
कलाकार :- जॉन अब्राहम,मृणाल ठाकुर,नोरा फतेही,रवि किशन
मूवी टाइप:- Action,Thriller

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Film review

फिल्म Batla House की कहानी शुरू होती है। दिल्ली में हुए सीरियल बम धमाका जोकि 13 सितंबर 2008 को हुआ था। इसी की जांच के सिलसिले में जो कि दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल के अफसर के के (रवि किशन) और संजीव कुमार यादव (जॉन अब्राहम) अपने टीम को लेकर Batla House L-18 नंबर की इमारत की तीसरी मंजिल पर पहुंचते हैं। जहां पर उनको मुजाहिदीन के संदिग्ध आतंकियों से मुठभेड़ होती है। जिसमें दो संदिग्ध आतंकवादियों की मौत हो जाती है। और उसके साथ ही एक पुलिसकर्मी भी घायल हो जाता है और केके की मौत हो जाती है। और एक संदिग्ध वहां से भाग निकलता है। इस एनकाउंटर के बाद देश में राजनीति और आरोप-प्रत्यारोपों का माहौल गरमा जाता है।

संजीव कुमार यादव की टीम पर विभिन्न राजनीतिक पार्टी और मानवाधिकार संगठनों के तरफ से बेकसूर स्टूडेंट को आतंकी ठहरा कर फर्जी एनकाउंटर करने के गंभीर आरोप लगाया जाता है। इस सिलसिले में संजीव कुमार यादव को राजनीति और अपने डिपार्टमेंट के चालो का सामना करना पड़ता है। इस चालो की वजह से संजीव कुमार यादव को पोस्ट ट्रॉमैटिक डिसॉर्डर जैसी मानसिक बीमारी से जूझना पड़ता है। और संजीव कुमार यादव को जांच को आगे बढ़ाने और अपने आप को निर्दोष साबित करने के सिलसिले में उनके हाथ बांध दिए जाते हैं। संजीव कुमार यादव की पत्नी नंदिता कुमार (मृणाल ठाकुर) उसका साथ देती है। 

निर्देशक निखिल अडवानी की फिल्म के नजरिए की बात करे तो एनकाउंटर के बाद पैदा हुए तमाम दृष्टिकोण दर्शकों को फिल्म में बनाए रखता है। इस परतों में पुलिस की जांबाजी, अपराधबोध, बेबसी, उसकी दागदार साख होती, पॉलिटिकल पार्टीज की राजनीति, मानवाधिकार संगठनों का आक्रोश, धार्मिक कट्टरता, मीडिया के प्रोजेक्शन और प्रेशर पर लगातार डिबेट होता है। फिल्म में कुछ ऐसे डायलॉग हैं जिसको सुनकर दर्शक खुश हो जाएंगे।

इस फिल्म की कहानी में पुलिस को कहीं भी महिमामंडित नहीं किया गया है इसमें पुलिस खुद अंडरडॉग है। जॉन अब्राहिम द्वारा तुफैल बने आलोक पांडे को कुरान की आयत को समझाने वाले कुछ सीन बेहतरीन बने हैं। निर्देशक निखिल अडवानी ने फिल्म में दिग्विजय सिंह, अरविंद केजरीवाल, अमर सिंह और एल के अडवानी जैसे नेताओं के रियल फुटेज का इस्तेमाल किया है। सौमिक मुखर्जी की सिनेमटोग्राफी बहुत ही बेहतरीन बनी है। निर्देशक निखिल अडवानी ने फिल्म को बहुत ही रियल्टी रखा है जो फिल्म को और ही बेहतरीन बनाता हैं।

कई गैलेंट्री अवॉर्ड्स से सम्मानित जांबाज और ईमानदार पुलिस अफसर अपनी व अपनी टीम को बेकसूर साबित कर पाता है? इसे जानने के लिए आपको फिल्म देखना होगा।

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