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Bhojpuri sohar geet lyrics: गरभ से रहली बहुरिया त सुतल रहली न हो

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गरभ से रहली बहुरिया त सुतल रहली न हो ए ललना सुतले में उठल दरदीया त दरदे व्याकुल हो

दरदे से व्याकुल बहुरिया त सासू के पजरा गइली हो, ए अम्मा उठी गईले आजु दरदीया मैं दरदे व्याकुल न हो।

बहुआ से बोलेली सासु त सुन बहुआ बोलियाँ न हो, ए बहुआ होखे द ना भोर भिनुसहरा त ले चलब हस्पीटल न हो।

दरदे से व्याकुल बहुरिया त गोतीन के पजरा गइली हो, ए दीदी उठी गईले आजु दरदीया मैं दरदे व्याकुल न हो।

बहुआ से बोलेली गोतीन त सुन बहुआ बोलियाँ न हो, ए दुल्हिन होखे द ना भोर भिनुसहरा त ले चलब हस्पीटल न हो।

दरदे से व्याकुल बहुरिया त स्वामी के पजरा गइली हो, ए धनी उठी गईले आजु दरदीया मैं दरदे व्याकुल न हो।

धनी से बोलेले स्वामी त सुन धनी बोलियाँ न हो, ए धनी होखे द ना भोर भिनुसहरा त ले चलब हस्पीटल न हो।

भोर भइले भइले भिनुसहरा त ले गइले हस्पीटल न हो ए ललना होई गइले गोदीया बलकवा त जिअरा हर्षित हो।

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